लू-तापघात से निपटने जिला प्रशासन अलर्ट
मोहला, 11 अप्रैल 2026/sns/-गर्मी के बढ़ते प्रभाव और संभावित लू-तापघात (हीट स्ट्रोक) की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति के निर्देशानुसार कलेक्ट्रेट परिसर में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन एवं नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जारी आदेश के अनुसार कलेक्ट्रेट भवन के कक्ष क्रमांक-14 (अपर कलेक्टर न्यायालय कक्ष) में यह नियंत्रण कक्ष संचालित होगा। यहां स्थापित दूरभाष क्रमांक 07747- 299613 पर आम नागरिक कार्यालयीन समय में संपर्क कर सकते हैं और लू-तापघात अथवा अन्य प्राकृतिक आपदा से संबंधित जानकारी दे सकते हैं। लू-तापघात से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डिप्टी कलेक्टर सुश्री शुमांगी गुप्ता को जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके सहयोग के लिए राहत शाखा से संबंधित कर्मचारी को सहायक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। नोडल अधिकारी जिले में राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करते हुए समन्वय स्थापित करेंगी। कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में तहसील स्तर पर भी नियंत्रण कक्ष स्थापित करें और वहां तैनात अधिकारियों की जानकारी जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएं। साथ ही, प्रत्येक दिन अपराह्न 3:00 बजे तक अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति की सूचना अनिवार्य रूप से जिला नियंत्रण कक्ष को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे भीषण गर्मी के दौरान सावधानी बरतें, अनावश्यक धूप में बाहर न निकलें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और लू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नियंत्रण कक्ष के दूरभाष नंबर पर सूचना देने का आग्रह किया गया है।
- भीषण गर्मी में लू से बचाव और उपचार के उपाय
भीषण गर्मी के चलते लू (तापघात) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लू लगने के प्रमुख लक्षणों में सिर में भारीपन और दर्द, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर आना, उल्टी होना, शरीर में कमजोरी और दर्द, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीना न आना, अत्यधिक प्यास लगना, पेशाब कम आना, भूख कम लगना तथा गंभीर स्थिति में बेहोशी शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लू का मुख्य कारण तेज धूप और गर्मी में लंबे समय तक रहने से शरीर में पानी और आवश्यक खनिज, विशेषकर नमक की कमी होना है। इससे बचाव के लिए बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें, धूप में जाते समय सिर और कान को कपड़े से ढकें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लंबे समय तक धूप में न रहें और हल्के, ढीले तथा सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को ठंडक मिलती रहे। अधिक पसीना आने पर ओआरएस घोल का सेवन करना लाभकारी है। यदि किसी को चक्कर या उल्टी की समस्या हो तो तुरंत छायादार स्थान पर आराम करें और ठंडा पानी, फल का रस, लस्सी या मठा लें, साथ ही 104 आरोग्य सेवा केंद्र से निःशुल्क परामर्श भी लिया जा सकता है। लू लगने पर प्राथमिक उपचार के तहत मरीज के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें, उसे हवादार स्थान पर लिटाएं, शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करते रहें और अधिक मात्रा में तरल पदार्थ जैसे आम का पना या जलजीरा पिलाएं। स्थिति गंभीर होने पर मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर मितानिन या एएनएम से ओआरएस पैकेट प्राप्त किया जा सकता है।
- हीट वेव (लू) को लेकर एडवाइजरी जारी, क्या करें और क्या न करें
प्रदेश में बढ़ती गर्मी और हीट वेव (लू) के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आमजन के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, भले ही प्यास न लगी हो, हालांकि मिर्गी, हृदय, गुर्दे या लीवर से संबंधित रोग वाले लोग तरल पदार्थ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें। गर्मी से बचाव के लिए हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें तथा ओआरएस घोल, लस्सी, बोरे बासी (चावल का पानी), नींबू पानी और छाछ जैसे घरेलू पेयों का सेवन करें। यथासंभव घर के अंदर रहें और यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो सिर और चेहरे को कपड़े, टोपी या छाते से ढकें तथा धूप में सतहों को छूने से बचें। घर को ठंडा रखने के लिए पर्दे, शटर का उपयोग करें, खिड़कियां खोलकर हवा का आवागमन बनाए रखें और निचली मंजिलों पर रहने का प्रयास करें। पंखों का उपयोग करें, कपड़ों को नम रखें और जरूरत पड़ने पर ठंडे पानी से स्नान करें। यदि किसी को तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, चक्कर, मतली, भ्रम, खांसी या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही पशुओं को भी छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं।
वहीं क्या न करें के तहत सलाह दी गई है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच विशेष रूप से धूप में बाहर न निकलें, नंगे पैर या बिना सिर और चेहरे को ढके बाहर न जाएं। अत्यधिक गर्मी के समय खाना पकाने से बचें और रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें। शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड पेय से दूरी बनाए रखें क्योंकि ये शरीर को निर्जलित करते हैं। इसके अलावा ज्यादा मसालेदार, तैलीय और उच्च प्रोटीन वाले भोजन से बचें तथा बासी खाना न खाएं। बीमार होने की स्थिति में धूप में बाहर जाने के बजाय घर पर ही आराम करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इन सावधानियों का पालन कर हीट वेव के दुष्प्रभावों से खुद को सुरक्षित रखें।