क्लस्टर स्तरीय शिविर एर्राबोर में सुशासन तिहार से गाँव-गाँव तक पहुँचा विकास
सुकमा, 25 मई 2026/sns/- दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाने का संकल्प अब धरातल पर सच साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा “सुशासन तिहार एवं बस्तर मुन्ने अभियान“ ग्रामीणों के जीवन में एक नई सुबह लेकर आया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को कोंटा विकासखंड के एर्राबोर में आयोजित क्लस्टर स्तरीय सुशासन शिविर में 10 पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण उमड़े। इस शिविर ने यह साबित कर दिया कि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी अब पूरी तरह मिट चुकी है, और सरकार खुद चलकर ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुँच रही है।
लक्ष्मी, अन्नप्राशन और गोद भराईरू शिविर में दिखा उत्सव का माहौल
एर्राबोर का यह शिविर केवल कागजी कार्यवाही का केंद्र नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों का एक उत्सव बन गया। छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में पारंपरिक खुशियों की गूँज सुनाई दी। शिविर में जहाँ एक ओर नन्हे-मुन्ने बच्चों को पहला निवाला खिलाकर “अन्नप्राशन“ की रस्म पूरी की गई, वहीं दूसरी ओर गर्भवती माताओं की “गोद भराई“ कर उनके सुरक्षित मातृत्व की कामना की गई। इतना ही नहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंगम्मा सोयम और सदस्य श्री कोरसा सन्नू ने खुद आम ग्रामीणों के बीच लाइन में खड़े होकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया, जिसने वहाँ मौजूद हर व्यक्ति के भीतर प्रशासन के प्रति एक गहरा भरोसा पैदा कर दिया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्री सोयम भीमा, सरपंच एर्राबोर श्रीमती लक्ष्मी कट्टम भी उपस्थित रही।
स्वावलंबन की नई उड़ान
एर्राबोर शिविर में महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 13.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया, जबकि सूरज समूह को 4 लाख रुपये का ऋण स्वीकृति पत्र सौंपा गया।लखपति दीदियों की। यह शिविर सुकमा की नारी शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन और उनके सपनों को पंख देने का गवाह भी बना। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत अध्या, हंशिका, प्रतिभा, सरिता और गुलाब जैसे महिला समूहों को लाखों रुपये के ऋण वितरित किए गए, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। शिविर का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण वह था जब क्षेत्र की 5 ग्रामीण महिलाओं-सोयम समशाद, सोढ़ी गंगी, बोड्डी मीना, रवा सुक्की और सेमला बजारी को “लखपति दीदी“ के प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, सोयम समशाद को अपना खुद का व्यवसाय मजबूत करने के लिए 5 लाख रुपये का च्डम्ळच् व्यक्तिगत ऋण का चेक सौंपा गया, जो यह दर्शाता है कि बस्तर की सुदूर कंदराओं में रहने वाली महिलाएं अब केवल गृहणी नहीं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं।
एक ही छत के नीचे 452 अर्जियों पर त्वरित एक्शन, कागजों से निकलकर जनता तक पहुँचा सुशासन
अक्सर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह शिविर किसी वरदान से कम नहीं था। राजस्व, स्वास्थ्य और पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी खुद जनता की समस्याएं सुनने बैठे थे, जिसके चलते विभिन्न विभागों को कुल 452 आवेदन प्राप्त हुए। शिविर की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जॉब कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज जो लोगों को हफ्तों तक नहीं मिलते थे, उनका यहाँ मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया। मौके पर ही आभा आईडी और स्वास्थ्य जाँच की सुविधा पाकर ग्रामीणों की आँखों में प्रशासन के प्रति एक अनूठा संतोष साफ देखा जा सकता था।
अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुँचाने का संकल्प
इस गरिमामयी आयोजन में जनपद और जिला स्तर के जनप्रतिनिधियों सहित एर्राबोर की सरपंच श्रीमती लक्ष्मी कट्टम और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सुशासन तिहार के इस सफल आयोजन ने बस्तर के संवेदनशील अंचलों में यह मजबूत संदेश दिया है कि सरकार की नीतियां केवल फाइलों या राजधानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा लाभ सीधे जनता के हाथों में सौंपा जा रहा है। जिला प्रशासन का यह मानवीय और सक्रिय प्रयास सुकमा के प्रत्येक गाँव को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाकर सुशासन की नींव को दिन-ब-दिन और मजबूत कर रहा है।