गोबर गैस संयंत्र हुआ पुनः क्रियाशील ग्रामीणों को मिलेगा स्वच्छ ऊर्जा का लाभसीईओ के निर्देश
रायगढ़, 13 जून 2026/sns/- जिले में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्राम बड़े देवगांव, जनपद पंचायत खरसिया स्थित गोबर गैस (बायोगैस) संयंत्र को पुनः क्रियाशील किया गया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़ के मार्गदर्शन में संयंत्र का विस्तृत स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्रेडा की तकनीकी टीम, जिला पंचायत रायगढ़ के एपीओ तथा संबंधित ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान संयंत्र की वर्तमान स्थिति, तकनीकी खामियों तथा संचालन संबंधी आवश्यकताओं का परीक्षण किया गया। अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से संयंत्र की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन कर आवश्यक सुधार कार्य किए गए, जिससे लंबे समय से प्रभावित संचालन को पुनः सुचारु बनाया जा सका। तकनीकी परीक्षण एवं आवश्यक मरम्मत कार्य पूर्ण होने के बाद गोबर गैस संयंत्र को सफलतापूर्वक पुनः चालू किया गया। संयंत्र से उत्पादित बायोगैस का उपयोग कर चूल्हे का संचालन किया गया, जिसके माध्यम से गैस आपूर्ति की वास्तविक स्थिति का परीक्षण एवं सत्यापन भी किया गया। परीक्षण के दौरान चूल्हा सुचारु रूप से संचालित हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संयंत्र अब पूर्ण रूप से कार्यशील स्थिति में है।
अधिकारियों ने बताया कि बायोगैस संयंत्रों की नियमित जांच, समय-समय पर रखरखाव तथा कार्यक्षमता का सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। इससे संयंत्रों का सतत संचालन सुनिश्चित होता है और हितग्राहियों को लंबे समय तक स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा का लाभ मिलता है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण और जैविक अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवसर पर संयंत्र से जुड़े हितग्राहियों एवं ग्रामीणों को बायोगैस संयंत्र के नियमित संचालन, गोबर की निर्धारित मात्रा में आपूर्ति तथा आवश्यक रखरखाव संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्हें बताया गया कि संयंत्र के बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में गोबर डालना, गैस पाइपलाइन की नियमित जांच करना तथा किसी भी तकनीकी समस्या की सूचना समय पर संबंधित विभाग को देना आवश्यक है। ग्रामीणों ने संयंत्र के पुनः शुरू होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उन्हें स्वच्छ ईंधन उपलब्ध होगा, रसोई गैस पर निर्भरता कम होगी तथा ईंधन संबंधी खर्च में भी कमी आएगी।