खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि कार्यशाला एवं कृषि मेला का हुआ आयोजन
कवर्धा, 17 जून 2026/sns/- किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा “खेत बचाओ अभियान 12 साल विश्वास के, जनकल्याण के” के अंतर्गत कृषि कार्यशाला एवं कृषि मेले का आयोजन किया गया। जिले में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 800 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कृषि क्षेत्र की नई तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला में किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि, आधुनिक कृषि तकनीकों एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि जैविक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रहती है, उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि “समृद्ध किसान ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला हैं।”
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ठाकुर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अध्यक्ष, कृषि कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ श्री सुरेश चंद्रवंशी, श्री राकेश तिवारी, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग छत्तीसगढ़ श्री विशेषर पटेल, श्री चैलेश्वर चंद्राकर, श्री राजेंद्र चंद्रवंशी, श्री भुनेश्वर चंद्राकर, श्री रविन्द्र सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक कवर्धा डॉ. सियाराम साहू, श्री पवन पटेल, जिला कृषि सभापति श्री रामकुमार भट्ट, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, श्री अशोक चंद्रवंशी तथा श्री मुकेश सिंह ठाकुर, श्री बसंत शर्मा, श्री भागवत साहू, श्री विनोद चंद्रवंशी, श्री त्रिलोक वर्मा, श्री नरेश साहू, श्री भोला सिन्हा, श्री हेमंत सिंह चैहान एवं श्री कुलेश साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र नेवारी, संत कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कवर्धा के सहयोग से किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, नवीन तकनीकों, उन्नत बीज, कृषि औषधियों तथा आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उत्कृष्ट एवं सफल किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। किसानों को उन्नत किस्म की अरहर मिनीकिट वितरित की गई तथा मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली बीज एवं आइस बॉक्स का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना तथा उन्हें आधुनिक, वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ना रहा।