वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

दुर्ग, 20 जून 2026/sns/- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी “Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India” Standard Operating Procedure (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के क्रम में ग्राम घुघसीडीह में सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण जागरूकता एवं संवाद बैठक का आयोजन ग्राम पंचायत भवन में किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर तथा वरिष्ठ न्यायालय प्रबंधक द्वारा ग्राम घुघसीडीह का भ्रमण किया गया तथा ग्रामवासियों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ विस्तृत संवाद स्थापित किया गया।
बैठक में उपस्थित ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उसके उद्देश्यों एवं लाभों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि, रास्ता, पानी, घरेलू एवं अन्य स्थानीय विवादों को न्यायालय में वाद प्रस्तुत किए जाने से पूर्व ही आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से सुलझाने की एक प्रभावी व्यवस्था है। इससे न केवल समय एवं धन की बचत होती है, बल्कि सामाजिक संबंध भी मधुर बने रहते हैं।
बैठक के दौरान ग्रामीणों को यह भी अवगत कराया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा जिले के पांच ग्रामों घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के लिए किया गया है। इन ग्रामों में स्थानीय स्तर पर विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान हेतु जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, संवाद सत्र तथा मध्यस्थता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत, दुर्ग की अध्यक्ष सुषमा लकड़ा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता आपसी संवाद एवं सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देती है। यह व्यवस्था ग्राम स्तर पर शांति, सौहार्द एवं सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे छोटे-छोटे विवादों को न्यायालय तक ले जाने के बजाय आपसी चर्चा एवं मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर द्वारा उपस्थित जनसमुदाय को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत एवं अन्य विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। साथ ही बताया गया कि सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विवादों की संख्या को कम करना तथा न्याय तक आसान एवं त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों, पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), महिलाओं, युवाओं एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने सहभागिता की तथा सामुदायिक मध्यस्थता कार्यक्रम के प्रति उत्साह व्यक्त किया। ग्रामीणों ने इस पहल को ग्राम स्तर पर विवादों के समाधान के लिए उपयोगी एवं सकारात्मक कदम बताते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आगामी दिनों में चयनित अन्य ग्रामों में भी इसी प्रकार के जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे “वाद-मुक्त ग्रामीण भारत” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जा सके। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय तक सरल पहुंच, सामाजिक समरसता एवं विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

About The Author