पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल सिमगा की शिक्षिका ने बच्चों के साथ बनाए ‘सीड बॉल

बलौदाबाजार,7 जुलाई 2026/sns/- पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के विकासखंड सिमगा से एक बेहद सराहनीय और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। शासकीय प्राथमिक शाला पौंसरी की एक शिक्षिका ने स्कूली बच्चों के सहयोग से बड़े पैमाने पर ‘सीड बॉल’ का निर्माण किया है। इस अनूठे नवाचार के जरिए उन्होंने न सिर्फ बच्चों को खेल-खेल में पर्यावरण का पाठ पढ़ाया, बल्कि पूरे जिले के सामने पर्यावरण जागरूकता की एक नई मिसाल पेश की है।शिक्षिका ने बच्चों के सहयोग से तैयार किए गए इन औषधीय और छायादार पौधों के सीड बॉल्स को कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल को भेंट किया। अधिकारियों ने शिक्षिका के इस जमीनी प्रयास की जमकर सराहना की और इसे अन्य स्कूलों के लिए भी अनुकरणीय बताया।

शिक्षिका भारती वर्मा ने बताया कि सीड बॉल मिट्टी, खाद और पौधों के बीजों को मिलाकर बनाई गई छोटी-छोटी गोलियां होती हैं। पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से इसका बहुत महत्व है । यह रोपण में बेहद ही आसान होता है। सीड बॉल को जमीन में गड्ढा खोदकर लगाने की जरूरत नहीं होती। इन्हें मानसून के दौरान खाली पड़े मैदानों, पहाड़ों या बंजर जमीनों पर सिर्फ फेंक दिया जाता है। बारिश का पानी पाते ही मिट्टी और खाद के आवरण में सुरक्षित बीज अंकुरित हो जाते हैं। खुले में फेंके गए बीजों को अकसर पक्षी या कीड़े खा जाते हैं, लेकिन मिट्टी और खाद की कोटिंग होने के कारण सीड बॉल के भीतर के बीज सुरक्षित रहते हैं। यह बहुत ही कम खर्चीला और प्रभावी तरीका है, जिससे बड़े पैमाने पर बंजर पड़े इलाकों को हरा-भरा बनाया जा सकता है।

शासकीय प्राथमिक शाला पौंसरी की इस मुहिम की खास बात यह रही कि स्कूल के बच्चे ही मिट्टी और देसी खाद जुटाने में मदद की और उत्साहपूर्वक बीजों को मिट्टी में मिलाकर गोलियां तैयार कीं। इस गतिविधि से बच्चों में टीम भावना, प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का अहसास विकसित हुआ है।
जब शिक्षिका इन सीड बॉल्स को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचीं, तो कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने शिक्षिका और बच्चों के इस कदम को सराहा।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शासकीय प्राथमिक शाला पौंसरी की यह गूंज अब अन्य शिक्षण संस्थानों को भी प्रेरित कर रही है। यदि हर स्कूल और गांव से इसी तरह की पहल शुरू हो जाए, तो आने वाले समय में जिले की हरियाली और पर्यावरण का भविष्य बेहद सुरक्षित होगा।

About The Author