जिला प्रशासन का कड़ा रुख जनपद पंचायत सुकमा के सहायक निलंबित

सुकमा, 10 जूलाई 2026/sns/- जिला प्रशासन ने पदीय दायित्वों के उल्लंघन और स्वेच्छाचारिता के खिलाफ एक बड़ी और प्रभावशाली कार्रवाई करते हुए शासन व्यवस्था में पारदर्शिता का मजबूत संदेश दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत की जिला प्रशासन के द्वारा की कार्यवाही की गई। जनपद पंचायत सुकमा में पदस्थ रहे सहायक ग्रेड-02 श्री चन्द्रशेखर चन्द्राकर के विरुद्ध जनप्रतिनिधियों द्वारा सामान्य सभा की बैठक में गंभीर शिकायतें की गई थीं। इन शिकायतों के आधार पर प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाते हुए पहले उनका स्थानांतरण जनपद पंचायत कोन्टा किया गया था। स्थानांतरण के बाद भी आदेश की अवहेलना करने और अधिकारियों के निर्देश के बाद देरी से कार्यभार ग्रहण करने को प्रशासन ने अनुशासनहीनता माना और शासकीय नियमों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई।
वित्तीय गड़बड़ी और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना पर कड़ा प्रहार
प्रशासनिक जांच और प्राप्त शिकायतों के अनुसार, स्थानांतरित होने के बावजूद कर्मचारी द्वारा कोन्टा कार्यालय में सौंपे गए कार्यों का संपादन नहीं किया जा रहा था। इसके विपरीत, उनके द्वारा अनाधिकृत रूप से जनपद पंचायत सुकमा में ही हस्तक्षेप करते हुए लगभग 17,50,000रू (सत्रह लाख पचास हजार रुपये) की राशि का चेक जारी कर दिया गया, जिसके एवज में राशि की मांग किए जाने की गंभीर शिकायत भी प्रशासन को मिली थी। इतना ही नहीं, संबंधित कर्मचारी ने कार्यालय प्रमुख की अनुमति के बिना ही सामान्य सभा में अपने स्थानांतरण को निरस्त करने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत कर दिया था। बार-बार मौखिक समझाइश के बाद भी कार्यशैली में सुधार न होना और इस प्रकार की मनमानी करना सीधे तौर पर उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है, जिसे प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया।
निलंबन आदेश जारी, व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की प्रतिबद्धता
कर्मचारी के इस स्वेच्छाचारी कृत्य को छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के विपरीत पाते हुए जिला पंचायत सुकमा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (आईएएस) मुकुन्द ठाकुर द्वारा सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। आदेश क्रमांक 1269 के तहत संबंधित कर्मचारी को छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील नियम) 1999 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जिला पंचायत मुख्यालय में संलग्न कर दिया गया है। इसके साथ ही, जनपद पंचायत सुकमा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को 7 दिनों के भीतर विस्तृत आरोप पत्र तैयार कर प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस त्वरित और नियमसंगत कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय कार्यों में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, लापरवाही और अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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