कृषि विभाग द्वारा तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट की रोकथाम हेतु किसानों को सलाह   

जांजगीर-चांपा, 24 अगस्त 2026/sns/- धान की फसल में तना छेदक एवं पत्ती मोड़क कीट के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को आवश्यक सावधानी बरतने एवं समय पर कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। उप संचालक कृषि ने बताया कि खेतों में अत्यधिक उर्वरकों का उपयोग तथा अधिक जल भराव होने से इन कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। तना छेदक कीट के प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में धान के पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे के तने के निचले हिस्से में छेद दिखाई देने तथा मुख्य तने के अंदर से खोखला होने के लक्षण भी दिखाई देते हैं। बाद की अवस्था में धान की बालियां सफेद होकर पूरी तरह सूख जाती हैं। उन्होंने तना छेदक कीट की रोकथाम के लिए क्लोरोसाइपर (क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत $ साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत) का 50 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।
इसी प्रकार पत्ती मोड़क कीट, जिसे ग्रामीण अंचलों में ‘सांवा कीट’ के नाम से भी जाना जाता है, के प्रकोप में हरी इल्ली पत्तियों को मोड़कर उनके अंदर छिप जाती है और पत्तियों के हरे भाग को खाकर सफेद एवं पारदर्शी धारियां छोड़ देती है। ये पत्ती मोड़क कीट के प्रमुख लक्षण हैं। पत्ती मोड़क कीट के नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 6 से 10 मिलीलीटर प्रति स्प्रेयर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी का 8 से 10 ग्राम प्रति स्प्रेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट प्रकोप के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर समय रहते उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं।

About The Author