जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और सुशासन से साकार हुआ पक्के मकान का सपना
सुकमा, 21 सितम्बर 2026/sns/- जिला प्रशासन सुकमा द्वारा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पहुँचाने का उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। जनपद पंचायत सुकमा के ग्राम पंचायत डोडपाल की 56 वर्षीय श्रीमती माड़वी भीमे लंबे समय से कच्चे मकान में रहकर बरसात में टपकती छत व सीलन की विकट समस्याओं का सामना कर रही थीं। ग्राम सभा और स्थानीय प्रशासन के त्वरित सहयोग से वित्तीय वर्ष 2024-25 में आवास प्लस के तहत उनका चयन किया गया, जिससे उनके परिवार को सम्मानपूर्वक सुरक्षित जीवन जीने की नई राह मिली।
प्रशासन की पारदर्शी एवं सुगम कार्यप्रणाली के चलते हितग्राही के बैंक खाते में समय पर किस्तें अंतरित की गईं। 12 मार्च 2025 को प्रथम किस्त के रूप में 40,000रू की राशि सीधे खाते में प्राप्त हुई। इसके बाद तकनीकी अमले ने मौके पर पहुंचकर ले-आउट दिया और सतत तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। लिंटल स्तर तक कार्य पूर्ण होने पर 18 जून 2025 को 55,000रू की दूसरी किस्त जारी की गई। प्रशासन की तत्परता और निरंतर निगरानी से प्रोत्साहित होकर हितग्राही ने 30 सितंबर 2025 तक अपने सुंदर पक्के मकान का निर्माण सफलता से पूरा कर लिया।
जिला प्रशासन ने “कन्वर्जेंस मॉडल“ का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए केवल आवास ही नहीं, बल्कि एक संपूर्ण और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12,000रू की लागत से शौचालय का निर्माण कराया गया। वहीं महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से 243रू प्रति दिवस की दर से कुल 23,085रू का मजदूरी भुगतान सीधे प्रदान कर परिवार को आर्थिक संबल दिया गया। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत उन्हें गैस सिलेंडर भी उपलब्ध कराया गया, जिससे उनका घर धुंआ-मुक्त और स्वस्थ बना।
नया पक्का आवास पाकर श्रीमती माड़वी भीमे ने भावुक होकर जिला प्रशासन और प्रशासनिक अमले का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों व तकनीकी टीम ने समय-समय पर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और हर कदम पर मार्गदर्शन दिया, जिसके कारण ही उनके पक्के मकान का सपना साकार हो सका। जिला प्रशासन की इस सक्रियता और निष्ठा की बदौलत दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में शासन की योजनाएं आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।