बाल संरक्षण की मजबूत कड़ी बनेंगी
बीजापुर, 23 सितम्बर 2026/sns/- महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बीजापुर द्वारा बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण तंत्र के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए जिले की चार परियोजनाओं भैरमगढ़, कुटरू, उसूर एवं बासागुड़ा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लिए एक दिवसीय क्षमता वर्धन सह उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य मैदानी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना तथा जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उन्हें शासकीय योजनाओं से जोड़ना था।
कार्यशाला में मिशन वात्सल्य टीम द्वारा देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (CNCP ) तथा विधि से संघर्षरत बच्चों (CICL) की पहचान, उनके अधिकार और उपलब्ध संरक्षण व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। साथ ही मिशन वात्सल्य के विभिन्न घटकों की प्रायोगिक जानकारी प्रदान की गई।
स्पॉन्सरशिप योजना से जरूरतमंद बच्चों को मिलेगा सहारा
कार्यकर्ताओं को स्पॉन्सरशिप योजना के संबंध में बताया गया कि ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता नहीं हैं, गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं अथवा जो एकल माता-पिता के साथ रह रहे हैं, उन्हें परिवार में रहते हुए पालन-पोषण के लिए शासन द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। कार्यकर्ताओं को पात्र बच्चों का चिन्हांकन एवं आवेदन प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
18 से 23 वर्ष तक आफ्टर केयर योजना का लाभ
बाल देखरेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद उनके पुनर्वास के लिए संचालित आफ्टर केयर योजना की जानकारी दी गई। इसके तहत शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार एवं आवास जैसी आवश्यकताओं के लिए 18 से 23 वर्ष की आयु तक सहायता उपलब्ध कराकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।
बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम पर जोर
कार्यशाला में बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति तथा अपशिष्ट संग्रह करने वाले बच्चों की पहचान एवं तत्काल सूचना देने की प्रक्रिया समझाई गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि गांव में यदि कोई बच्चा भीख मांगते, कचरा बीनते, मजदूरी करते, बाल विवाह की स्थिति में या माता-पिता की मृत्यु के बाद असहाय अवस्था में दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति अथवा संबंधित पर्यवेक्षक को दी जानी चाहिए।
पॉक्सो एक्ट और बाल अधिकारों की दी जानकारी
कार्यकर्ताओं को पॉक्सो एक्ट 2012, किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 तथा बाल अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान कराने के लिए गुड टच-बैड टच, बच्चों से संवाद की मनोवैज्ञानिक विधि तथा संवेदनशील परिस्थितियों में आवश्यक सहयोग एवं रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।
कानूनी दत्तक ग्रहण प्रक्रिया की जानकारी
दत्तक ग्रहण के संबंध में कार्यकर्ताओं को बताया गया कि बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही की जानी चाहिए। इच्छुक दंपत्तियों को ब्।त्। पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होता है। गैर-कानूनी तरीके से बच्चे को गोद लेना या देना अपराध है।
कार्यशाला में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने कहा कि अब तक उनकी प्रमुख भूमिका पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक केंद्रित रही है, लेकिन प्रशिक्षण के बाद वे बाल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम होंगी। कार्यशाला में भैरमगढ़, उसूर, बासागुड़ा एवं कुटरू परियोजनाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के साथ सेक्टर पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहे।