बायोफ्लॉक तालाब से चंपा मंडल को मिला आय का नया जरिया

अम्बिकापुर, 24 सितम्बर 2026/sns/-  प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए दिए जा रहे अनुदान से जिले के हितग्राही आधुनिक तकनीक अपनाकर मछली पालन को आय का बेहतर माध्यम बना रहे हैं। चंपा मंडल भी इसी योजना का लाभ लेकर बायोफ्लॉक तालाब में मछली पालन कर रही हैं और अब उनकी खाली पड़ी जमीन आय के नए स्रोत में बदल गई है
चंपा मंडल बताती हैं कि उनकी जमीन पहले खाली पड़ी थी। मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें बायोफ्लॉक तालाब निर्माण की स्वीकृति मिली। इकाई की लागत 14 लाख रुपये है, जिसमें महिला, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तक अनुदान तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। चंपा मंडल को 8 लाख 40 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।
अनुदान से बायोफ्लॉक तालाब तैयार कर उसमें मछली का संचयन किया गया। करीब चार माह पहले मछलियां डाली गई थीं, जो अब अच्छी तरह से बड़ी हो रही हैं। चंपा मंडल के अनुसार लगभग डेढ़ माह बाद मछलियों की बिक्री शुरू करने की तैयारी है। बाजार में थोक भाव लगभग 120 रुपये प्रति किलोग्राम मिलने की उम्मीद है। इससे उन्हें मछली पालन से अच्छी आमदनी प्राप्त होने की संभावना है।
चंपा मंडल के परिवार के सदस्य भी अलग-अलग कार्यों से जुड़े हैं। बायोफ्लॉक तालाब मिलने के बाद परिवार के लिए मछली पालन आय का एक अतिरिक्त और स्थायी जरिया बन गया है।
चंपा मंडल ने योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की सहायता से खाली पड़ी जमीन का उपयोग मछली पालन के लिए किया जा सका है। अब उन्हें उम्मीद है कि मछली की बिक्री से परिवार की आमदनी में और वृद्धि होगी।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से आधुनिक मत्स्य पालन को प्रोत्साहन मिलने से हितग्राही न केवल स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे हैं, बल्कि अपनी उपलब्ध भूमि और संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

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