पहली बार सीसीएसएच में हुई बाइपास सर्जरी, एमवीआर में पहली बार लगाया गया
जगदलपुर, 30 सितंबर 2026/sns/- बस्तर अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़ा नहीं रह गया है। अब यहां भी वे जटिल ऑपरेशन और सर्जरी हो रहे हैं, जिनके लिए पहले सैकड़ों किलोमीटर तक की दौड़ लगाकर रायपुर, विशाखापट्टनम, हैदराबाद तक जाना पड़ता था। डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में पहली बार बुजुर्ग महिला के हृदय की सफल बाइपास के साथ वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई है। महिला अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी हैं, जिनके डिस्चार्ज की तैयारी की जा रही है। कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हुई ये सर्जरी अपने आप में बस्तर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होती दिख रही है।
बस्तर ब्लॉक के बनियागांव निवासी 70 वर्षीय श्रीमती जलपरी जोशी हृदयरोग से ग्रसित थीं। पूर्व में उन्होंने इसके लिए जांच भी करवाई। एंजियोग्राफी में पता चला कि उनके हृदय का एक वॉल्व पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका है। वहीं एक नस में भी ब्लॉकेज बताया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल सर्जरी करने की सलाह दी थी।
करीब एक महीने पहले श्रीमती जलपरी जोशी के परिजनों ने उन्हें कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। चूंकि यहां कार्डियक विभाग शुरू होने के साथ ही यहां हृदयरोग से संबंधित सर्जरी और उपचार लगातार जारी है, ऐसे में उन्होंने यहीं श्रीमती जलपरी जोशी का इलाज करवाने का निश्चय किया।
कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सीटीवीएस सर्जन डॉ. मनोज कुमार महाराणा, क्रिटिकल केयर एवं कार्डियक एनेस्थिसिस्ट डॉ. सौरभ कुमार व नॉन इन्वेजिव कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मयूरी शरद ने उनकी जांच की और सर्जरी के लिए सबसे पहले उनकी और उनके परिजनों की काउंसिलिंग की। जब परिजन सर्जरी के लिए सहमत हो गए तो श्रीमती जलपरी जोशी के व्हाइटल्स को सामान्य किया गया, जिसमें शुगर-बीपी अहम थे।
सारे घटकों को सामान्य करने के बाद डॉक्टर्स की टीम ने नवनिर्मित कैथलैब में सर्जरी की योजना तैयार की और बीते 27 सितंबर को उनकी सफल सर्जरी की गई। सीटीवीएस सर्जन डॉ. मनोज कुमार महाराणा व क्रिटिकल केयर एवं कार्डियक एनेस्थिसिस्ट डॉ. सौरभ कुमार ने बताया कि सर्जरी करीब साढ़े 3 घंटे तक चली, जिसमें सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बाइपास ग्राफ्टिंग) और एमवीआर (मिट्राल वॉल्व रिप्लेसमेंट) सर्जरी को अंजाम दिया गया। एमवीआर के दौरान उनके हृदय में टिशू वॉल्व लगाया गया है। सफल सर्जरी के बाद अब श्रीमती जलपरी जोशी पूरी तरह स्वस्थ्य हो चुकी हैं और डॉक्टर्स की टीम उन्हें डिस्चार्ज की तैयारी में जुट गई है।
डॉ. मनोज कुमार महाराणा ने बताया कि 70 वर्षीय महिला की सर्जरी पूरी तरह सफल रही है। उन्होंने बताया कि हृदयरोग का उपचार किसी भी उम्र में किया जा सकता है। हालांकि श्रीमती जलपरी जोशी के मामले में उनके उम्रदराज होने के बावजूद सफल सर्जरी होना अपने आपमें बड़ी उपलब्धि है।
इस सफल सर्जरी में परफ्यूजनिस्ट रसूल, मधु, एनेस्थिशिया टेक्निशियन अक्षय, फूलो, गजेंद्र, भारती, नंदिनी ने सहयोग किया।
जानिए, क्या है टिशु या बायोप्रोस्थेटिक वॉल्व
टिशु वॉल्व, जिसे जैविक या बायोप्रास्थेटिक वॉल्व भी कहा जाता है, हृदय का एक कृत्रिम वॉल्व है, जिसे प्राकृतिक ऊतकों से बनाया जाता है। आमतौर पर इसे गाय के ऊतकों या झिल्लियों से तैयार किया जाता है। कुछ मामलों में दान किए गए मानव हृदय के वॉल्व (होमोग्राफ्ट या एलोग्राफ्ट) का भी उपयोग किया जाता है। इसकी विशेषता ये होती है कि यह प्राकृतिक हृदय वॉल्व की तरह खुलता और बंद होता है, जिससे रक्त का प्रवाह सुचारू रहता है। इसके अलावा इस तरह के वॉल्व से मरीज को खून पतला करने की (ब्लड थिनिंग) की दवा लेने की जरूरत नहीं होती। एक टिशु वॉल्व आमतौर पर 15 से 20 साल तक चलता है। यदि कभी इसके बदलने की नौबत आती है तो बिना छाती खोले भी केवल कैथेटर के जरिए इसे बदलकर वॉल्व इन वॉल्व तकनीक से बदला जा सकता है।