बस्तर के कांदानार में दूर हुई वर्षों पुरानी समस्या



जगदलपुर, 29 सितंबर 2026/sns/- बस्तर जिले के वनांचल एवं दुर्गम क्षेत्र विकासखंड दरभा अंतर्गत ग्राम पंचायत कांदानार के ग्रामीणों को अब हर महीने राशन के लिए मीलों दूर भटकने की मजबूरी से हमेशा के लिए निजात मिल गई है। गाँव में पक्का राशन दुकान भवन न होने के कारण ग्रामीणों को पहले आवश्यक खाद्यान्न लेने के लिए लगभग 9 से 10 किलोमीटर की कठिन और लंबी दूरी पैदल या अन्य साधनों से तय करनी पड़ती थी। इस पूरी प्रक्रिया में दिनभर का समय बीत जाने से जहाँ एक ओर दैनिक श्रमिकों की दिहाड़ी मजदूरी छूट जाती थी और उन्हें आर्थिक क्षति उठानी पड़ती थी, वहीं दूसरी ओर आवागमन के साधनों पर अतिरिक्त धन का व्यय भी होता था। विशेष रूप से दुर्गम रास्तों पर भारी राशन सामग्री उठाकर लाने में बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा दिव्यांगजनों को अत्यधिक कष्टदायक स्थिति का सामना करना पड़ता था।  
ग्रामीणों की इस गंभीर और वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान तलाशते हुए जिला प्रशासन ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना तथा जिला खनिज संस्थान न्यास के अभिसरण से गाँव में ही एक सर्वसुविधायुक्त पक्का भवन बनाने की स्वीकृति दी। ग्राम पंचायत कांदानार को कार्य एजेंसी बनाकर 10 लाख रुपए की स्वीकृत राशि तय की गई थी, जिसके तहत यह निर्माण कार्य निर्धारित बजट से भी कम यानी मात्र नौ लाख 70 हजार रुपए की लागत में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इस संयुक्त प्रयास में डीएमएफटी मद से आवश्यक वित्तीय बजट, सामग्री एवं संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जबकि मनरेगा के माध्यम से गाँव के ही स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराकर निर्माण अवधि के दौरान उनकी आजीविका को संबल प्रदान किया गया।  
गाँव में ही उचित मूल्य दुकान भवन स्थापित हो जाने से ग्रामीणों के जीवन में व्यापक और सकारात्मक बदलाव आया है। अब ग्रामीणों को खाद्यान्न के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती और गाँव में ही सुलभता से राशन प्राप्त हो रहा है। इससे आवागमन का खर्च समाप्त हो गया है और समय की बचत होने से ग्रामीण बिना किसी रुकावट के अपने नियमित कृषि व मजदूरी कार्य कर पा रहे हैं। साथ ही नवनिर्मित भवन में रैंप और सुरक्षात्मक व्यवस्था होने से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं व दिव्यांगों के लिए राशन प्राप्ति बेहद आसान और सुरक्षित हो गई है। इसके अलावा, पक्के भवन के निर्माण से चावल, शक्कर और नमक जैसी राशन सामग्रियों का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित हुआ है, जिससे खाद्यान्न खराब होने की चिंता भी पूरी तरह समाप्त हो गई है। मनरेगा और डीएमएफटी का यह सफल अभिसरण न केवल वनांचल क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास का भी एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

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