सेवा की कहानीः खाली पड़ी जमीन पर बायोफ्लॉक मछली पालन से विप्लब ने बनाई आय की नई राह’
अम्बिकापुर, 29 सितम्बर 2026/sns/- खाली पड़ी जमीन अब मछली उत्पादन के जरिए आय का नया माध्यम बनने जा रही है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की योजनाओं से आजीविका के क्षेत्र में आ रहे बदलाव की ऐसी ही कहानी विप्लब हलदर की है। मत्स्य विभाग की सहायता से बायोफ्लॉक तालाब में मछली पालन शुरू कर उन्होंने उस जमीन का उपयोग आय अर्जित करने के लिए शुरू किया है, जहां पहले किसी प्रकार का उत्पादन नहीं होता था।
विप्लब बताते हैं कि पहले जमीन खाली पड़ी रहती थी और उससे कोई आमदनी नहीं होती थी। मत्स्य विभाग से योजना की जानकारी और सहायता मिलने के बाद उन्होंने बायोफ्लॉक पद्धति से मछली पालन की शुरुआत की। वर्तमान में तालाब में मछली उत्पादन किया जा रहा है और मछलियों के बिक्री योग्य आकार में आने का इंतजार है।
’14 लाख रुपए इकाई लागत में 40 प्रतिशत मिला अनुदान’
बायोफ्लॉक तालाब निर्माण की इकाई लागत 14 लाख रुपए निर्धारित है। योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस सहायता का उद्देश्य हितग्राहियों को मत्स्य पालन से जोड़कर स्वरोजगार एवं आय के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
विभागीय सहायता मिलने से विप्लब ने भी मछली पालन को आजीविका के रूप में अपनाया है। वे बताते हैं कि पहले खाली पड़े स्थान से कोई उत्पादन नहीं मिल रहा था, लेकिन अब उसी स्थान पर मछली उत्पादन से आमदनी की संभावना बढ़ी हैं।
’तीन माह बाद बिक्री की तैयारी, बाजार को लेकर आश्वस्त हैं बिप्लब’
बिप्लब के अनुसार वर्तमान में मछलियों को बढ़ने में लगभग तीन माह का समय और लगेगा। इसके बाद मछलियां बिक्री योग्य आकार में आ जाएंगी। उनका कहना है कि तैयार मछलियों की बिक्री में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी और स्थानीय बाजार में इसकी मांग उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि बाजार में मछली की कीमत लगभग 120 रुपए तक मिलती है।
’मछली पालन से अतिरिक्त आय की संभावनाएं’
विप्लब का कहना है कि मछली पालन से किसानों और ग्रामीण हितग्राहियों के लिए आय का नया माध्यम तैयार हो सकता है। योजना के तहत मिलने वाली विभागीय सहायता से मत्स्य पालन शुरू करने में सहूलियत मिल रही है। बिप्लब को उम्मीद है कि पहली बिक्री के बाद इससे होने वाले लाभ का स्पष्ट आकलन हो सकेगा और आगे वे इस गतिविधि को और बेहतर तरीके से जारी रख सकेंगे।
उन्होंने योजना के माध्यम से मिली सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि मछली पालन को मिल रहे प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका और आमदनी बढ़ाने के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।