मलेरिया उन्मूलन की दिशा में प्रभावी पहल ग्राम पंचायत अर्जुनल्ली में रात्रि चौपाल का आयोजन

बीजापुर, 22 जनवरी 2026/sns/- कलेक्टर श्री संबित मिश्रा के कुशल नेतृत्व एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबें एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री बी.आर. पुजारी के मार्गदर्शन में जिले में मलेरिया उन्मूलन एवं जन-जागरूकता को सशक्त बनाने हेतु ग्राम पंचायत अर्जुनल्ली में मलेरिया जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। इस रात्रि चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, मितानिन दीदियाँ, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि एवं बीजादूतीर वॉलंटियर सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को मलेरिया रोग के कारण, इसके फैलने के माध्यम, प्रमुख लक्षणों एवं समय पर उपचार के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। बताया गया कि मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है तथा इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर दर्द एवं उल्टी शामिल हैं। समय पर जांच एवं इलाज न होने की स्थिति में यह बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है। रात्रि चौपाल में मलेरिया से बचाव के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। ग्रामीणों को घर एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखने, पानी का जमाव न होने देने, मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घरों में कीटनाशक छिड़काव कराने तथा बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने हेतु प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि मलेरिया की जांच एवं उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध है।
कार्यक्रम को प्रभावी एवं रोचक बनाने हेतु प्रोजेक्टर के माध्यम से मलेरिया रोकथाम से संबंधित शैक्षणिक वीडियो एवं चित्रात्मक प्रस्तुतीकरण दिखाया गया, जिससे ग्रामीणों को विषय को सरल भाषा में समझने में सहायता मिली। ग्रामीणों ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
इस अवसर पर मितानिन दीदियों एवं बीजादूतीर वॉलंटियर्स ने समुदाय स्तर पर मलेरिया नियंत्रण में अपनी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय तेलगु भाषा में नियमित जन-जागरूकता, घर-घर संपर्क एवं स्वच्छता गतिविधियों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम की सराहना करते हुए मलेरिया से बचाव के लिए बताए गए उपायों को अपनाने का भरोसा दिलाया। रात्रि चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को मलेरिया के प्रति जागरूक कर, सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से मलेरिया उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम उठाना रहा, जिससे स्वस्थ एवं सुरक्षित समाज का निर्माण किया जा सके।

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