मजदूरी छोड़ ’लखपति दीदी’ बनीं मति बाई मुर्गी पालन से संवर रही है परिवार की भविष्य

अम्बिकापुर, 23 अप्रैल 2026/sns/-  छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ’लखपति दीदी’ अभियान ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की रहने वाली श्रीमती मति बाई ने अपनी मेहनत और शासन की मदद से आज स्वावलंबन की एक नई इबारत लिखी है।

समूह से जुड़कर बनी आत्मनिर्भर
मति बाई बताती हैं कि कुछ समय पहले तक उनका परिवार जीवन-यापन के लिए मज़दूरी और छोटे-मोटे कार्यों पर निर्भर था। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन ’राधा स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उनकी किस्मत बदल गई। उन्होंने समूह के माध्यम से 3 लाख रुपये का ऋण लिया और मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया।

सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय
कभी आर्थिक तंगी का सामना करने वाली मति बाई आज गर्व से बताती हैं कि मुर्गी पालन के व्यवसाय से उन्हें साल भर में 2 से 3 लाख रुपये की शुद्ध आय हो रही है। इस आय ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि उन्हें समाज में ’लखपति दीदी’ के रूप में एक नई पहचान भी दिलाई है।

परिवार का मिला साथ, बच्चों का भविष्य हुआ सुरक्षित
मति बाई के इस व्यवसाय में उनका पूरा परिवार हाथ बंटाता है। उनके तीन बच्चे भी काम में मदद करते हैं, जिससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आई है। मति बाई कहती हैं कि पहले हम मज़दूरी के लिए भटकते थे, लेकिन अब पैसे का निरंतर आवक बनी रहती है। मेरे बच्चे भी अब बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हम अपने पैरों पर खड़े हैं और हमारा पूरा परिवार खुश है।

योजना के लिए शासन का जताया आभार
श्रीमती मति बाई ने अपनी सफलता का श्रेय शासन की योजनाओं को देते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कारण ही आज ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और मज़दूरी छोड़कर खुद का व्यवसाय खड़ा कर पा रही हैं।

मति बाई की यह कहानी छत्तीसगढ़ के ’सशक्त महिला, सशक्त प्रदेश’ के संकल्प को सिद्ध करती है। शासन की लखपति दीदी योजना आज हज़ारों महिलाओं के लिए आर्थिक आज़ादी का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

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