शासकीय उद्यान रोपणी पेण्ड्री की बगिया ग्रीष्म ऋतु में भी खुबसूरत फूलों से गुलजार
राजनांदगांव, 15 मई 2026/sns/- इन दिनों पेण्ड्री स्थित शासकीय उद्यान रोपणी की बगिया ग्रीष्म ऋतु में भी खुबसूरत फूलों से गुलजार है। वहीं वृक्ष विभिन्न वेरायटी के आम जिनमें आम्रपाली, लंगड़ा, दशहरी, चौसा, बाम्बेग्रीन लदे हुए हैं। राहत और सुकून से भरे शासकीय उद्यान रोपणी में विभिन्न प्रजाति के पौधों का संग्रहण मन को उल्लास से भर देने वाला है। सबसे खास बात यह है कि किसानों के लिए यहां प्लग टाईप वेजीटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन यूनिट में जापानी पद्धति से नमी, तापमान एवं प्रकाश की संतुलित मात्रा के माध्यम से बीज से थरहा तैयार किया जा रहा है। जिससे किसानों को आसानी से थरहा उपलब्ध हो जाता है। अभी यहां योगी नामधारी मिर्च की प्रजाति का थरहा लगाया गया है। किसान स्वयं बीज देकर यहां थरहा लगा रहे हैं। सीडलिंग यूनिट के जीर्णाद्धार का कार्य डीएमएफ की राशि से किया गया है। जिससे यहां पुन: किसानों के लिए अंकुरित पौधे उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। नर्सरी में कलमी पौधे, ग्रुटी पौध, शंकर पपीता, शंकर मुनगा और बिजू पौधे ब्रिकी के लिए उपलब्ध हैं। शासकीय उद्यान रोपणी पेण्ड्री समृद्ध नर्सरी है, जहां फूल एवं फलों की विभिन्न किस्में उपलब्ध है। यहां आम, अमरूद, संतरा, आंवला, लीची, अनार, पपीता, नारियल, अशोक, गंधराज, चंपा, गुलमोहर, हरसिंगार, बाटल ब्रश, चीकू, सिल्वर ओक, एक्जोरा, यूफोर्बिया, रातरानी, कदम, पीपल, बोगनविलिया, गुलाब, मनीप्लांट, अलमेंडा, रजनीगंधा, जरबेरा, कनेर, सहित विभिन्न पौधे बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
गौरतलब है कि ऑटोमेटिक सीडलिंग प्रोडक्शन यूनिट के अंतर्गत सीडलिंग के लिए नारियल बुरादा, परलाईड, वर्मी कोलाईट का उपयोग किया जाता है। इसमें मृदा का उपयोग नहीं किया जाता। बीज का विकास मशीनरी स्वींग मेथड से होता है। प्लग टाईप वेजीटेबल सीडलिंग प्रोडक्शन यूनिट में टमाटर, बैंगन, पत्ता गोभी, फूल गोभी, खीरा, करेला, कद्दू, लौकी जैसी फसलों का सिडलिंग किया जाता है। प्रतिकूल मौसम में भी नर्सरी तैयार की जा सकती है। बीज का अंकुरण नियंत्रित वातावरण में होता है। अधिकतम संख्या में पौधे तैयार होते हैं। प्रति एकड़ बीज की मात्रा कम लगती है। तैयार की जाने वाली पौध नर्सरी स्वस्थ, एक समान एवं रोग रहित होती है। रोपण करने हेतु सही समय पर नर्सरी तैयार हो जाती है। प्रत्येक पौधे में निर्धारित आवश्यकतानुसार जड़ों का विकास होता है। उचित जड़ों के विकास के कारण खेत में ट्रांसप्लाटिंग टीपी उपरांत पौधों की जीवितता प्रतिशत अधिक होती है। अपेक्षाकृत कम अवधि में फलन प्रारंभ हो जाता है। सभी पौधों की एक समान वृद्धि होती है।