नैनो उर्वरकों के उपयोग से सब्जी की फसलों में मिल रहे बेहतर परिणाम किसानों ने साझा किए अनुभव
अम्बिकापुर, 17 जून 2026/sns/- कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को खेती अधिक सरल, किफायती और लाभकारी बनाने में सहायता मिल रही है। इसी क्रम में नैनो उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से बढ़ रहा है। नैनो उर्वरक कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार देखा जा रहा है।
कृषक प्रेमनाथ ने नैनो उर्वरक का किया सफल प्रयोग
सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम जगदीशपुर निवासी कृषक प्रेमनाथ ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में भिंडी सहित अन्य सब्जी फसलों की खेती कर रहे हैं और पारंपरिक खाद की जगह नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं।
कृषक प्रेमनाथ ने बताया कि नैनो उर्वरक बाजार से आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और खेत में स्प्रे करना भी सरल है। उन्होंने कहा कि उन्होंने भिंडी, लौकी, खीरा सहित विभिन्न फसलों में नैनो उर्वरकों का छिड़काव किया है, जिससे फसलों की वृद्धि और उत्पादन में सकारात्मक असर देखने को मिला है।
नैनो उर्वरक के प्रमुख लाभ और विशेषताएं
कृषक प्रेमनाथ के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं। यह बाजार में आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ खेत में पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करना भी बेहद सरल है। नैनो कण सीधे पत्तियों के माध्यम से पौधों तक पहुंचकर फसल की आवश्यकता के अनुसार सटीक पोषण प्रदान करते हैं, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर और शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है। साथ ही पारंपरिक रासायनिक खादों पर होने वाले खर्च में कमी आने से किसानों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। यही कारण है कि नैनो उर्वरक आधुनिक एवं लाभकारी खेती के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
उन्नत खेती के लिए किसानों से की गई अपील
अपने सफल प्रयोग के बाद कृषक प्रेमनाथ ने अन्य किसानों से भी अपील की है। उनका कहना है कि चाहे सब्जी की खेती हो या धान जैसी पारंपरिक फसलें, सभी किसानों को नैनो उर्वरकों का उपयोग अवश्य करना चाहिए। इससे फसल को बेहतर पोषण मिलता है और भूमि की गुणवत्ता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।