कृषि सखियों और बीआरसी समूहों को मिला जैविक खाद और कीटनाशक बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण

सुकमा, 20 जून 2026/sns/- जिला प्रशासन एवं उप संचालक कृषि, सुकमा के कुशल मार्गदर्शन में स्थानीय कृषि सखियों और बीआरसी संचालित समूहों के सदस्यों के लिए आयोजित चार दिवसीय सघन जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 15 जून से 18 जून 2026 तक चले इस विशेष आयोजन में कोंटा, सुकमा तथा छिंदगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ अपनी सहभागिता दर्ज की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर खेती के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना है।
इस चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान दंतेवाड़ा के श्भूमगादी जैविक कृषक संगठनश् से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्री सुरेश कुमार नाग एवं श्री उदय कुमार नाग द्वारा प्रतिभागियों को जैविक खेती के बुनियादी सिद्धांतों और कीट नियंत्रण के तौर-तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव पर विशेष जोर दिया गया, जिसके तहत प्रतिभागियों को स्वयं नमक घोल, बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, अरंडी खाद, ब्रह्मास्त्र, नीमस्त्र, 3ळ व हांडी दवा जैसे प्रभावी जैविक खादों एवं कीटनाशकों का प्रत्यक्ष निर्माण करना सिखाया गया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध संसाधनों जैसे करंज, नीम, बेशर्म, आक, सीताफल की पत्ती, गाय के गोबर और गोमूत्र के व्यावहारिक उपयोग के गुर भी सिखाए गए ताकि खेती की लागत को न्यूनतम किया जा सके।
प्रशिक्षण के अंतिम चरण में आगामी खरीफ मौसम को ध्यान में रखते हुए कृषि सखियों और समूह सदस्यों के साथ मिलकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई, जिससे जिले के सुदूर गांवों तक जैविक तकनीकों का प्रभावी प्रसार सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम के समापन के अवसर पर उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल, एसडीओ (कृषि) श्री कुजूर, और आत्मा परियोजना से श्री विश्वकर्मा सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताते हुए संकल्प लिया कि वे इस सीजन में सीखी गई उन्नत तकनीकों को अंतिम छोर के किसानों तक पहुँचाकर सुकमा जिले में जैविक क्रांति की नई नींव रखेंगे।

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