खरीफ सीजन हेतु जिले में 54778 मेट्रिक टन उर्वरक का भण्डारण अब तक 42 हजार मेट्रिक वितरित

बलौदाबाजार,6 जुलाई 2026/sns/- राज्य शासन के मंशा अनुरूप एवं कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिले में खरीफ सीजन 2026 के लिये जिले में उर्वरक भण्डारण किया जा रहा है। जिले को 85430 मिट्रिक टन उर्वरक लक्ष्य प्राप्त हुआ है जिसके विरुद्ध 420 82 मेट्रिक टन उर्वरक भण्डारण किया गया हैं जिसमें यूरिया 29391, डीएपी 5409, पोटाश 3100, एसएसपी 7455 तथा एनपीके 9423 कुल 54778 मिट्रिक टन हो चुका है। अब तक यूरिया 22185, डीएपी 4344, पोटाश 2141, एसएसपी 5249 तथा एनपीके 8163 कुल 42082 मिट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। जिले में उर्वरक भण्डारण वितरण का कार्य निरंतर जारी है।

इसी तरह खरीफ वर्ष 2026 में बीज की मांग, उपलब्धता, भण्डारण एवं वितरण किया जा रहा है। जिले में धान सामान्य, धान हाई ब्रिड, मक्का हाई ब्रिड, कोदो, कुटकी, रागी, अरहर, उड़द, मूंग, कुल्थी, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, रामतिल, सूर्यमुखी एवं सन् एवं ढेंचा का कुल भण्डारण 34566.80 क्विंटल लक्ष्य है जिसके विरूध्द 32803.70 क्विंटल वितरण किया जा चुका है।

वैकल्पिक उर्वरकों पर जोर – कृषि विशेषज्ञों के अनुसार केवल डी.ए.पी. पर निर्भर रहना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि इससे मिट्टी का संतुलन भी बिगड़ सकता है। बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है। धान जैसी प्रमुख खरीफ फसल के लिए यूरिया, सुपर फॉस्फेट, पोटाश और एन.पी. के. जैसे उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग करना लाभकारी साबित होता है तथा डीएपी पर निर्भरता कम कर इसे वैकल्पिक उर्वरक के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही कृषकों को नील हरित काई, हरी खाद तथा जैव उर्वरक (बायो-फर्टिलाइजर्स) का उपयोग करने हेतु भी सलाह दिया गया है, जो की रासायनिक उर्वरको के निर्भरता पर कमी लाएगी।किसान बोरियों वाली खाद के स्थान पर नैनों यूरिया एवं नैनो डीएपी (तरल) को प्राथमिकता दें। यह न केवल परिवहन में आसान है बल्कि इसकी उपयोग क्षमता 90 प्रतिशत तक है। इसके छिड़काव से फसल को सीधा पोषण मिलता है और जमीन भी खराब नहीं होती ।

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