गांव में लौटी जल समृद्धि मोर गांव मोर पानी महाअभियान से लबालब हुई जल संरचनाएं

कवर्धा, 08 जुलाई 2026/sns/- कबीरधाम जिले में भीषण गर्मी के दौरान मोर गांव मोर पानी महाअभियान अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार और जल संरक्षण करने के उद्देश्य से विकसित भारत जी राम जी योजना से बनाए जा रहे आजीविका डबरी और नवा तरिया का सकारात्मक परिणाम अब बारिश के महीने में देखने को मिल रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतो में अभी तक 253 आजीविका डबरी और 25 नवा तरिया का निर्माण किया गया है। जिसमें क्रमशः 225170 घन मीटर एवं 207234 घन मीटर सहित कुल 432404 घन मीटर वर्षा जल का संग्रहण होगा। उल्लेखनीय है कि मोर गांव मोर पानी महाअभियान अंतर्गत कबीरधाम जिले में वर्षा जल को रोकने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके अंतर्गत घरो में सोख्ता गड्ढा, बोरवेल रिचार्ज पिट, विभिन्न ग्राम पंचायतों में नए तालाबों का निर्माण, पुराने तालाबों का गहरीकरण, नालों की गाद सफाई, पहाड़ों पर कंटूर ट्रेंच जैसे अनेक कार्य कराये गए हैं। लगातार प्रयासों के ही सुखद नतीजे है कि गांव में जल समृद्धि लौट रही है।
इस संबंध में चर्चा करते हुए कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि कबीरधाम जिला वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है।जिसके परिणाम स्वरूप यहां वर्षा जल में असमानता देखने को मिलती है। गिरते भू-जल स्तर और कम होते पानी को सहजने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गत वर्ष से ही जल संरक्षण का अभियान जारी रखा है। ग्रामीणों को जल संरचनाओं के निर्माण से बड़ी मात्रा में रोजगार और मजदूरी भुगतान प्राप्त हुआ है। निर्माण कार्य का लगातार निरीक्षण बैठकों के माध्यम से समीक्षा तथा ग्रामीणों के सकारात्मक सहयोग से बहुत ही अल्प समय में सभी प्रमुख जल संरचनाओं का निर्माण पूरा हुआ और जल संरक्षण के रूप में सुखद नतीजे सामने आ रहे हैं।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि रोजगार, आजीविका और जल संरक्षण तीनों ही विषयों को आजीविका डबरी एवं नवा तरिया के कार्यों से जोड़ा गया है। इन कार्यों से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, मत्स्य पालन और उद्यानिकी फसलों के विस्तार से रोजगार एवं आजीविका के नए स्रोत ग्रामीणों के लिए खुलेंगे।

जल संरक्षण,रोजगार और आजीविका के अभियान पर एक नजर

1) आजीविका डबरी – कुल 253 आजीविका डबरी बने है। प्रत्येक का क्षेत्रफल 20×20 मीटर (400 वर्ग मीटर) है। लागत 1 लाख 40 हजार रुपए प्रति नग है। कुल 185248 मानव दिवस का रोजगार ग्रामीणों को मिला और 3 करोड़ 68 लाख 87 हजार 700 रुपए का मजदूरी भुगतान ग्रामीणों को प्राप्त हुआ। एक डबरी में लगभग 890 घन मीटर पानी रुकेगा तथा 253 डबरी में 225170 घन मीटर पानी का संग्रहण होगा। सभी डबरियो से लगभग 253 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, भू-जल स्तर में वृद्धि होगी तथा आसपास के हैंडपंप रिचार्ज होंगे। मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी फसलों के लिए ग्रामीणों को सहायता मिलेगी तथा आजीविका की गतिविधियों का विस्तार होगा।
2) नवा तरिया – कुल 25 नवा तरिया का निर्माण हुआ है। प्रत्येक का क्षेत्रफल 80×80 मीटर (6400 वर्ग मीटर) है। लागत 10 लाख रुपए प्रति नग है।इस कार्य से कुल 103751 मानव दिवस का रोजगार ग्रामीणों को मिला और 1 करोड़ 80 लाख 57 हजार रुपए का मजदूरी भुगतान ग्रामीणों को प्राप्त हुआ। एक नवा तरिया में लगभग 7146 घन मीटर पानी रुकेगा तथा 25 नवा तरिया में 207234 घन मीटर पानी का संग्रहण होगा। इन सभी तरिया से लगभग 290 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, भू-जल स्तर में वृद्धि होगी तथा आसपास के हैंडपंप को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी। मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी फसलों के साथ सामूहिक वृक्षारोपण हेतु ग्रामीणों को सहायता मिलेगी तथा आजीविका की गतिविधियों का विस्तार होगा।
3) कंटूर ट्रेंच – जनपद पंचायत स.लोहारा के ग्राम पंचायत गागंपुर के ग्राम कोराइडोंगरी में 15.48 एकड़ बंजर भूमि पर 2,511 कंटूर ट्रेंच बनाए गए हैं। वहीं ग्राम पंचायत बड़ौदाकला के ग्राम बड़ौदाकला में 13.70 एकड़ भूमि पर 2,464 कंटूर ट्रेंच का निर्माण पूर्ण किया गया है।इन संरचनाओं से वर्षा जल का बेहतर संचय होगा जिससे भू-जल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण और हरियाली बढ़ाने में मदद मिलेगी।कंटूर ट्रेंच से ग्रामीणों को 5049 मानव दिवस का रोजगार मिला है और 13 लाख 17 हजार 789 रुपए का मजदूरी भुगतान प्राप्त हुआ। दोनों कंटूर ट्रेंच में अनुमानित 53 लाख 72000 लीटर वर्षा जल का संग्रहण होगा।

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