आयोग ने दिलाई मृतक पति की बीमा क्षतिपूर्ति की राशि
बलौदाबाजार, 13 जुलाई 2026/sns/-बीमा कंपनी द्वारा प्रधानमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत मृतक पति की बीमा क्षतिपूर्ति की राशि प्रदाय नहीं किये जाने के मामले में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार द्वारा बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के तहत बीमा क्षतिपूर्ति राशि 200000 एवं उपभोक्ता को मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति हेतु राशि 15000 तथा वाद-व्यय हेतु 7000 रूपये एवं खाते में पूर्व जमा राशि 27288 परिवादिनी को प्रदाय किये जाने का आदेश दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम साबर, तहसील कसडोल निवासी परिवादिनी तिहारीन बाई पैकरा के पति स्व. फागुलाल पैकरा का भारतीय स्टेट बैंक कसडोल में खाता था जिससे मृतक फागुलाल पैकरा द्वारा प्रीमियम राशि देकर विरोधी पक्षकार नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड रायपुर से प्रधानमंत्री दुर्घटना बीमा योजना पालिसी लिया था।दुर्घटना में फागुलाल पैकरा की मृत्यु होने पर मृतक की पत्नी परिवादिनी तिहारीन बाई पैकरा द्वारा मृतक पति की बीमा क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने बाबत बीमा कंपनी के कार्यालय में बीमा दावा प्रस्तुत किया गया।बीमा कंपनी द्वारा बीमा दावा निरस्त कर दिया गया जिससे परिवेदित होकर परिवादिनी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार में परिवाद प्रस्तुत किया।
आयोग के अध्यक्ष रंजना दत्ता एवं सदस्यगण हरजीत सिंह चांवला व शारदा सोनी ने पेश दस्तावेजों एवं संबंधित नियम आदि का सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाया कि बीमा कंपनी द्वारा बीमा दावा निरस्त करने का मूल आधार लिया गया है कि मृतक द्वारा स्वयं लापरवाहीपूर्वक मोटर सायकल चलाते हुये दुर्घटना कारित किया है एवं उसके पास वैध व प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नही था व आवश्यक दस्तावेज पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश नही किया गया है । प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेज अनुसार स्व. फागुलाल पैकरा के दुर्घटना की सूचना पुलिस थाने में दिया गया गंभीर चोट आने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया दस्तावेजों से परिलक्षित है कि चोटे दूसरी वाहन के लापरवाहीपूर्वक चलाने से कारित हुई है। ड्राइविंग लाइसेंस एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट नही होने की स्थिति में दावा राशि नही दिये जाने के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का दस्तावेजी साक्ष्य या प्रमाण विरोधी पक्षकार बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस प्रकरण में विरोधी पक्षकार क्र 02 बीमा कंपनी का कथन स्वीकार किये जाने योग्य नही है। परिवादिनी, विरोधी पक्षकार बीमा कंपनी से बीमा योजना के तहत बीमा क्षतिपूर्ति राशि 200000 प्राप्त करने की अधिकारी है।