नक्सल पीड़ित बुजुर्ग को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का अधिकार
सुकमा, 07 अगस्त 2026/sns/- दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के अभियान के तहत ग्राम पुनपल्ली (दुब्बाटोटा), विकासखंड कोंटा में आयोजित आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान ने संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश की। शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम 78 वर्षीय नक्सल पीड़ित बुजुर्ग महिला श्रीमती वंजाम चिंगे के घर पहुंची और उनके आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर वय वंदन कार्ड तैयार किया। अब उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार शासकीय एवं चिन्हित अस्पतालों में मिल सकेगा।
श्रीमती वंजाम चिंगे का जीवन नक्सल हिंसा की त्रासदी से जुड़ा रहा है। वर्ष 2006 में नक्सलियों ने उनके पति स्वर्गीय वंजाम देवे की हत्या कर दी थी। वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाली इस बुजुर्ग महिला तक जब प्रशासन स्वयं पहुंचा और स्वास्थ्य सुरक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया, तो यह केवल एक कार्ड बनाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार का प्रतीक बन गया।
शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए, वहीं स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की भी व्यवस्था की गई। जांच के दौरान चार मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए, जिनका तत्काल उपचार शुरू किया गया। इसके अलावा सूजन से पीड़ित तीन मरीजों को बेहतर जांच और इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोरनापाल रेफर किया गया, ताकि उन्हें समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध हो सके।
दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन लगातार सक्रिय है। आयुष्मान भारत संतृप्ति अभियान के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच प्रदान किया जा रहा है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि शासन की हर जनकल्याणकारी योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यह पहल विकास के साथ-साथ विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।