कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने पंडरिया अनुविभागीय और तहसील न्यायालय का किया औचक निरीक्षण
कवर्धा, 11 सितंबर 2026/sns/- कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने आज पंडरिया अनुविभागीय न्यायालय एवं तहसील न्यायालय का औचक निरीक्षण कर न्यायालयीन कार्यों और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने डायवर्सन, भू-अर्जन, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अपील सहित अन्य प्रकरणों की जानकारी ली। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण में तथ्यों का परीक्षण कर पूरे विवेक और निष्पक्षता के साथ न्यायसंगत आदेश पारित करें।
कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने अपील प्रकरणों की जानकारी लेते हुए पूछा कि कितने मामलों में अपील हुई और कितने आदेश परिवर्तित या निरस्त हुए। उन्होंने कहा कि इसके आधार पर तहसीलदारों के न्यायालयीन कार्यों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ न्यायालयों से संबंधित प्रकरण समय पर प्रस्तुत करने तथा निचले न्यायालय से प्रकरण मंगाए जाने पर तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि न्यायालयीन कार्यों में अनावश्यक देरी और लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
कलेक्टर श्रीमती प्रजापति ने कहा कि निर्धारित पेशी के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाए और पक्षकारों को समय पर तामीली कराई जाए, ताकि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले। उन्होंने भू-अर्जन प्रकरणों की समीक्षा करते हुए किसानों से जुड़े मामलों की जानकारी ली और कहा कि किसानों एवं अन्य पक्षकारों की बात गंभीरता से सुनकर नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि आगामी निरीक्षण में न्यायालय के प्रकरणों का एक-एक कर अवलोकन किया जाएगा।
कलेक्टर ने डायवर्सन प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों को इसकी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की सरल जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों में पारदर्शिता और समय-सीमा का पालन करते हुए लंबित मामलों का तेजी से निराकरण करने के निर्देश दिए। इस दौरान पंडरिया एसडीएम श्री संदीप ठाकुर, तहसीलदार उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने कहा ई-अटेंडेंस में लापरवाही नहीं चलेगी, ई-ऑफिस कार्यों में प्रगति लाने के दिए निर्देश
पंडरिया न्यायालयों के निरीक्षण के बाद कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने एसडीएम एवं तहसील कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों की बैठक लेकर विभागवार कार्यों और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी-कर्मचारी कार्यालयीन समय का पालन करें और अपने दायित्वों का गंभीरता एवं जिम्मेदारी से निर्वहन करें। कलेक्टर ने कहा कि सुबह 10 बजे कार्यालय पहुंचने के बाद तथा कार्यालय से प्रस्थान करते समय बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है। उन्होंने उपस्थिति रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए जिन कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज नहीं थी, उन्हें नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने एसडीएम एवं तहसीलदार को इसकी नियमित निगरानी करने को कहा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अगले निरीक्षण में बायोमैट्रिक उपस्थिति की स्थिति की भी जांच की जाएगी।
कलेक्टर ने राज्य शासन के निर्देशानुसार सभी शासकीय कार्य शत-प्रतिशत ई-ऑफिस के माध्यम से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फाइलों के अनावश्यक लंबित रहने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। ई-ऑफिस से फाइल संबंधित अधिकारी तक उसी दिन पहुंचेगी, जिससे कार्यों के निराकरण में तेजी आएगी और फाइल की स्थिति की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। उन्होंने सभी तहसीलों के कर्मचारियों को ई-ऑफिस का प्रशिक्षण दिलाने और इसकी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि ई-ऑफिस में काम करना अब प्राथमिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य व्यवस्था है।