घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में मोबाइल कैंप, 814 ग्रामीणों का आधार पंजीकरण व सत्यापन

सुकमा, 11 सितम्बर 2026/sns/- कभी घने जंगलों और अनिश्चितता के साए में गुमनाम जिंदगी जीने को मजबूर बस्तर के अंतिम छोर पर बसे ग्रामीणों के चेहरों पर अब अपनी वैधानिक पहचान मिलने का संतोष और मुस्कान साफ देखी जा सकती है। सुकमा जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल “नियद नेल्लानार“ (आपका अच्छा गांव) के अंतर्गत कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में दूरस्थ और पहुंचविहीन अंदरूनी इलाकों में विशेष आधार सेवा शिविर आयोजित किए गए। नक्सल प्रभावित रहे पुवर्ती, कोंडासावली, किस्टाराम, बुर्कापाल, जगरगुंडा और मिनपा जैसे वनांचलों में जब प्रशासनिक अमला बायोमैट्रिक मशीनें और तकनीकी उपकरण लेकर पहुंचा, तो ग्रामीणों को लगा कि अब विकास सचमुच उनके दरवाजे तक दस्तक दे चुका है।
सालों से पहचान पत्र के अभाव में सरकारी योजनाओं, राशन और आर्थिक सहायता से वंचित रहे 18 वर्ष से अधिक आयु के ग्रामीणों के लिए यह शिविर किसी उत्सव से कम नहीं था। ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मो. शाहिद के अनुसार, पुवर्ती, बैनपल्ली, पामलूर और दुरनदरभा समेत 16 अंदरूनी गांवों से कुल 814 नागरिक शिविर में पहुंचे। इनमें से 100 ग्रामीणों का जीवन में पहली बार नवीन आधार नामांकन हुआ, जबकि 714 नागरिक पहले से पंजीकृत पाए गए। तकनीकी टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर ही 454 आवेदनों का सफल निष्पादन कर ग्रामीणों को वर्षों पुरानी परेशानी से मुक्ति दिलाई।
इस अभियान का सबसे मार्मिक और मानवीय पहलू उन बुजुर्गों और युवाओं के चेहरों पर झलका, जो अब तक केवल एक पहचान पत्र बनवाने के लिए मीलों पैदल चलकर ब्लॉक मुख्यालय जाने से कतराते थे। गांव में ही शिविर लगने से न केवल उनका समय और धन बचा, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी मिला कि शासन-प्रशासन हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ा है। पहली बार पहचान पत्र का टोकन हाथ में थामे ग्रामीणों की आंखें यह बयां कर रही थीं कि अब उनके हिस्से का राशन, पेंशन और बैंक खाता किसी बिचौलिए या तकनीकी अड़चन की भेंट नहीं चढ़ेगा।
दुर्गम रास्तों, नदी-नालों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार कर ग्रामीणों तक पहुंचे ऑपरेटरों और मैदानी कर्मचारियों के जज्बे ने इस पूरी मुहिम को सफल बनाया है। शत-प्रतिशत कवरेज के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने शेष 246 छूटे हुए नागरिकों की सूची भी तैयार कर ली है, जिनके लिए जल्द ही फॉलो-अप शिविर लगाए जाएंगे। नियद नेल्लानार के तहत बस्तर के इन बीहड़ों में पहुंच रही यह प्रशासनिक सक्रियता इस बात का ठोस प्रमाण है कि सुशासन अब सुकमा के अंतिम छोर पर खड़े हर नागरिक को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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