साय सरकार की नीतियों से बदल रही सुकमा की तस्वीर
सुकमा, 13 सितम्बर 2026/sns/- कभी नक्सलवाद के साए में पहचाने जाने वाले सुकमा जिले में अब विकास, शांति और सशक्त उद्यमिता का नया सूर्याेदय हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन और दूरदर्शी नेतृत्व में बस्तर अंचल के सुदूर क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम रंग लाने लगी है। इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश करते हुए सुकमा की स्थानीय इकाई ‘शबरी हर्बल्स’ ने देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत न्यूट्रीवर्स प्रदर्शनी’ में अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराई। बंदूक के खौफ को पीछे छोड़ते हुए सुकमा के स्थानीय हुनर और प्राकृतिक उत्पादों ने राष्ट्रीय पटल पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।
राज्य शासन के उद्योग विभाग की सक्रिय पहल और सुदृढ़ नीतिगत सहयोग के चलते शबरी हर्बल्स को देश के इस सबसे बड़े मंच पर अपने स्टॉल के जरिए उत्पाद प्रदर्शित करने का सुअवसर मिला। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय प्रदर्शनी में बस्तर के वनों पर आधारित जैविक एवं पारंपरिक औषधीय उत्पादों ने देशभर से आए उद्यमियों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा। आगंतुकों ने वनांचल के शुद्ध और पारंपरिक उत्पादों की न केवल जमकर सराहना की, बल्कि बड़े व्यापारिक गठबंधनों के लिए भी गहरी रुचि दिखाई, जो प्रशासन के स्थानीय आजीविका संवर्धन मॉडल की बड़ी सफलता है।
प्रदर्शनी के दौरान बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने शबरी हर्बल्स के प्रतिनिधियों से आत्मीय भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान बस्तर और सुकमा के वनोपज एवं स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने, मूल्य संवर्धन करने और ग्रामीण स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विस्तृत कार्ययोजना साझा की गई। शासन और जन प्रतिनिधियों का यह सीधा संवाद यह सिद्ध करता है कि अंतिम छोर पर बैठे उद्यमी को भी हर संभव प्रशासनिक संबल और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है।
शबरी हर्बल्स के संचालक श्री जगन्नाथ साहू ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए छत्तीसगढ़ शासन, उद्योग विभाग और बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप के प्रति आभार जताते हुए कहा कि प्रशासन के अटूट सहयोग के बिना यह यात्रा संभव नहीं थी। यह उपलब्धि मात्र किसी एक उद्यम की सफलता नहीं, बल्कि प्रशासन के उस दृढ़ संकल्प का प्रत्यक्ष प्रमाण है जिसके तहत बस्तर की समृद्ध वन संपदा और स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त बनाकर क्षेत्र में
स्थायी शांति, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।