जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में दो साल से अधिक की देरी पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी

अम्बिकापुर, 13 अक्टूबर 2026/sns/-   जन्म एवं मृत्यु का पंजीयन कराने में देरी होने पर अब निर्धारित नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करनी होगी। भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 में संशोधन के बाद विलंब से प्राप्त होने वाली सूचनाओं के पंजीयन के लिए नए प्रावधान लागू किए गए हैं। इस संबंध में आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), जिला सरगुजा द्वारा आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

एक वर्ष से अधिक की देरी पर निर्धारित प्रक्रिया का करना होगा पालन
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष बाद, लेकिन दो वर्ष के भीतर पंजीयन के लिए सूचना दिए जाने पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अथवा डिवीजनल मजिस्ट्रेट या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के द्वारा प्राधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश पर घटित स्थानों के रजिस्ट्रार (जन्म मृत्यु ) के द्वारा पंजीयन किया जाएगा। वहीं, जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद सूचना दिए जाने पर पंजीयन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर उस स्थान के रजिस्ट्रार द्वारा किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि उक्त नियमों के लिए भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (संशोधित 2023) में संशोधन करते हुए रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ (संशोधन) अधिनियम 2026 अधिनियमित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 13 में संशोधन करते हुए उपधारा (3) के स्थान पर नई उपधारा (3) तथा उपधारा (3ए) प्रतिस्थापित  की गई हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य विलंब से प्राप्त होने वाली जन्म-मृत्यु संबंधी सूचनाओं के पंजीयन की प्रक्रिया को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप संचालित करना है।
इन संशोधित नियमों को लेकर कलेक्टर कार्यालय द्वारा सभी संशोधित प्रावधानों का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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