सुकमा के समन्वय केंद्र को मिली राष्ट्रीय पहचान

सुकमा, 13 अक्टुबर 2026/sns/-कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के लिए पहचाने जाने वाले सुकमा जिले ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में तकनीक और संवेदनशीलता के संगम से सुशासन की नई मिसाल पेश की है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की श्स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिवश् के तहत जिला प्रशासन के द्वारा समन्वय केंद्र सेवा का विस्तार करते हुए अभिनव प्रस्ताव “सुकमा कनेक्ट दृ सीएमसीसी 2.0” प्रस्तुत किया गया था जिसे 1.17 करोड़ रू की वित्तीय मंजूरी मिली है। पूरे देश से केवल 14 प्रस्तावों का चयन हुआ है जिसमें सुकमा जिला शामिल है। यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि घने जंगलों में बसे उस अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की उम्मीद है जो वर्षों से मुख्यधारा से कटे हुए थे।
मार्च 2026 से संचालित सीएमसीसी 1.0 (केंद्रीकृत निगरानी एवं नियंत्रण केंद्र) दूरस्थ वनांचल के ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बनकर उभरा है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में अब तक 40,000 से अधिक फोन कॉल्स के जरिए न सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम झोपड़ी तक पहुंचाई गई, बल्कि ग्रामीणों के अधिकार भी सुनिश्चित किए गए। इस पहल के मानवीय चेहरे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके जरिए 10,078 जरूरतमंदों के आयुष्मान कार्ड और 11,103 नए मतदाता पहचान पत्र बने, जबकि 5,788 आधार नामांकन और 27,391 बायोमेट्रिक अपडेट पूरे किए गए। यही नहीं, 452 महिला स्व-सहायता समूहों का गठन कर 4,745 परिवारों को आजीविका से जोड़कर आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई गई।
अब सीएमसीसी 2.0 के जरिए यह नेटवर्क और अधिक मानवीय व तकनीकी रूप से सशक्त होने जा रहा है। परियोजना के तहत स्थानीय बोलियों में 24×7 बहुभाषी आउटरीच सेंटर स्थापित किया जाएगा, ताकि भाषा की बाधा दूर हो सके। साथ ही, दो मोबाइल सर्विस वैन सीधे अंदरूनी पगडंडियों और गांवों तक जाकर मौके पर ही आधार और नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इसके अलावा, 198 आवासीय विद्यालयों एवं आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली और शाला-त्यागी (आउट-ऑफ-स्कूल) बच्चों की विशेष ट्रैकिंग व्यवस्था से शिक्षा से वंचित बच्चों को वापस क्लासरूम तक लाने का ठोस प्रयास किया जाएगा।
कलेक्टर स्तर के एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड से लैस यह पूरी प्रणाली योजनाओं की केवल निगरानी नहीं करेगी, बल्कि सुकमा को दूरस्थ आदिवासी अंचलों में “टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लास्ट-माइल गवर्नेंस“ का एक राष्ट्रीय मॉडल बनाएगी। यह मॉडल साबित करता है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक का संवेदनशील उपयोग हो, तो भूगोल और संसाधन कभी भी आम नागरिक के हक और सम्मान की राह में रोड़ा नहीं बन सकते। समन्वय केंद्र के संचालन में सहायक आयुक्त श्री हेमंत सिन्हा, पीपीआईए फेलो सुश्री अर्कजा और श्री सौरभ का विशेष योगदान है।

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