ग्राम वरदेलपाड़ में तिल की उन्नत खेती पर कृषक प्रशिक्षण आयोजित

सुकमा, 14 अक्टुबर 2026/sns/- ग्राम वरदेलपाड़, पंचायत पोलमपल्ली में समूह अग्रिम पंक्ति फसल प्रदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत तिल की उन्नत खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 100 किसान भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा के कीट वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार सिदार ने किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी देते हुए कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
 डॉ. सिदार ने तिल की खेती में भूमि की तैयारी, उन्नत किस्मों का चयन, बीज उपचार, उचित बीज दर, कतारबद्ध बुवाई, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं खरपतवार नियंत्रण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने तिल की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले पत्ती मोड़क, फली छेदक, माहू एवं बिहार की रोयेंदार इल्ली जैसे प्रमुख कीटों तथा रोगों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन के उपाय बताए। साथ ही एकीकृत कीट प्रबंधन पर जोर देते हुए जीवामृत, बीजामृत एवं जैविक कीट नियंत्रण तकनीकों को अपनाकर खेती की लागत घटाने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने धान की बाली अवस्था में माहू, गंधी बग एवं पैनिकल माइट जैसे कीटों की पहचान, उनसे होने वाले नुकसान तथा नियंत्रण के उपायों की जानकारी भी दी।
कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री संतोष तलाड़ी ने परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन एवं आत्मनिर्भर दलहन मिशन के अंतर्गत संचालित शासकीय योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने, वैज्ञानिक खेती को प्राथमिकता देने तथा नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि फसलों में कीटों की सही पहचान कर अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने से नुकसान को कम किया जा सकता है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एसएडीओ, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, आत्मा के अधिकारी, किसान मित्र, सरपंच, वार्ड पंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला एवं पुरुष किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, फसल सुरक्षा एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर उनकी उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि के लिए प्रोत्साहित करना था। इस पहल से किसानों को आधुनिक कृषि ज्ञान से जोड़ने तथा क्षेत्र में टिकाऊ एवं लाभकारी खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया गया।

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