ग्रामीण पत्रकारिता को मिलेगी नई पहचान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दो विश्वविद्यालयों के बीच हुआ एमओयू
ग्रामीण पत्रकारिता को मिलेगी नई पहचान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दो विश्वविद्यालयों के बीच हुआ एमओयू
गांवों की समस्याओं और विकास की कहानियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, ग्रामीण युवाओं के लिए खुलेंगे मीडिया में करियर के नए अवसर
संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो के माध्यम से जमीनी पत्रकारिता को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर, 29 अक्टूबर 2026/
ग्रामीण अंचलों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और युवाओं को पत्रकारिता के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर और गोंडवाना विश्वविद्यालय, गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) के बीच ग्रामीण पत्रकारिता को सशक्त बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी से छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में पत्रकारिता शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और ग्रामीण पत्रकारिता ही जमीनी वास्तविकताओं को समाज के सामने लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों के साझा प्रयासों से ऐसे पत्रकार तैयार किए जाएंगे, जो संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ ग्रामीण विकास, स्थानीय समस्याओं तथा जनजीवन से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने लाएंगे।
गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रशांत बोकारे ने इस समझौते को ग्रामीण पत्रकारिता के संवर्धन और उन्नयन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
समझौता ज्ञापन पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा तथा गोंडवाना विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद सरफराज अंसारी ने हस्ताक्षर किए।
एमओयू के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से संगोष्ठियों, सेमिनारों और कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे। ये गतिविधियां ऑफलाइन, ऑनलाइन और हाइब्रिड माध्यमों से संचालित होंगी, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी, शिक्षक और पत्रकार भी इनका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही संयुक्त शोध, प्राध्यापक आदान-प्रदान, छात्र इंटर्नशिप और सामुदायिक रेडियो के माध्यम से ग्रामीण संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इस शैक्षणिक साझेदारी से ग्रामीण युवाओं को आधुनिक पत्रकारिता की तकनीकों से परिचित होने, व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने और स्थानीय मुद्दों को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनजातीय जीवन से जुड़े विषयों को पत्रकारिता की मुख्यधारा में अधिक स्थान मिल सकेगा।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र मोहंती, डॉ. नृपेन्द्र शर्मा और डॉ. आशुतोष मंडावी सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।
