हरी खाद से बढ़ेगी उपज घटेगी लागत ढैंचा अपनाने की किसानों को सलाह

मुंगेली, 24 अप्रैल 2026/sns/sns/- कृषि विभाग ने किसानों को खेती की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद के रूप में ‘ढैंचा’ अपनाने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया और डीएपी पर निर्भरता कम करने के लिए ढैंचा एक प्रभावी एवं किफायती विकल्प है। ढैंचा फसल हवा से नाइट्रोजन को अवशोषित कर मिट्टी में स्थिर करती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता एक तिहाई तक कम हो जाती है। यह मिट्टी को भुरभुरा बनाकर उसकी उर्वरता बढ़ाता है, जलधारण क्षमता में सुधार करता है तथा खरपतवार नियंत्रण में भी सहायक होता है। धान के साथ अंतरफसल के रूप में भी इसका उपयोग लाभकारी पाया गया है।
कृषि विभाग के उपसंचालक ने बताया कि ढैंचा की बुआई खेत की अच्छी तरह जुताई के बाद लाइन या छिड़काव विधि से की जा सकती है। जब फसल 02 से 03 फीट ऊंची हो जाती है, तब उसे ट्रैक्टर से पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है, जिससे वह सड़कर प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और उत्पादन में मजबूती आती है। कृषि विभाग ने बताया कि ढैंचा को किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है, लेकिन खरीफ सीजन में इसकी बुआई अधिक लाभकारी होती है। किसान हरी खाद के रूप में ढैंचा का अधिक से अधिक उपयोग कर जैविक खेती को बढ़ावा दें और अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाएं।

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