सुशासन तिहार ने दूर की लोहर साय की चिंता 2017 से लंबित वन अधिकार पट्टे का हुआ नामांतरण
अम्बिकापुर, 15 मई 2026/sns/- राज्य शासन द्वारा जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए चलाए जा रहे सुशासन तिहार अभियान के तहत सुदूर अंचलों के ग्रामीणों के चेहरे पर खुशियां लौटने लगे हैं। इसका एक जीवंत उदाहरण ग्राम पंचायत मूरता में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में देखने को मिला, जहां वर्षों से लंबित वन अधिकार पत्र (पट्टा) के नामांतरण का मामला सुशासन तिहार के मंच पर ही सुलझा लिया गया।
पिता के निधन के बाद भटक रहे थे लोहर साय
जिले के सीतापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत रजपुरी निवासी लोहर साय के लिए सुशासन तिहार जीवन में एक नई आर्थिक सुरक्षा और संबल लेकर आया है। हितग्राही लोहर साय ने बताया कि वर्ष 2017 में उनके पूज्य पिताजी का देहांत हो गया था। उनके नाम पर आवंटित वन अधिकार पत्र (पट्टा) के नामांतरण के लिए वे लंबे समय से प्रयासरत थे। उन्होंने इसके लिए वन विभाग में आवेदन भी दिया था, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने में लगातार विलंब हो रहा था।
सुशासन तिहार में मौके पर हुआ पट्टा वितरण
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप, सुशासन तिहार के विशेष अवसर पर वन विभाग और जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए नामांतरण की सभी औपचारिकताएं तेजी से पूरी कीं। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में लोहर साय को उनके नाम पर परिवर्तित नया वन अधिकार पट्टा ससम्मान वितरित किया गया। लोहर साय ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, मैं और मेरा पूरा परिवार आज बेहद खुश हैं। जो पट्टा सालों से मेरे स्वर्गीय पिताजी के नाम पर अटका था, वह अब सुशासन तिहार की बदौलत मेरे नाम पर आ गया है। अब मुझे अपनी जमीन का वास्तविक हक मिल गया है।
खुलेंगे आर्थिक समृद्धि के नए द्वार
नया पट्टा हाथ में आने के बाद अब लोहर साय की राह की कई कानूनी और आर्थिक अड़चनें दूर हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इस पट्टे के माध्यम से अब वे किसान क्रेडिट कार्ड से खेती-किसानी के लिए आसान ऋण ले सकेंगे और शासन की अन्य कृषि और कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकेंगे।
गांव- गांव पहुंच रहा जिला प्रशासन
लोहर साय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आज अधिकारी खुद गांव-गांव, घर-घर आकर आम जनता की तकलीफों को सुन रहे हैं और मौके पर ही उनका निपटारा कर रहे हैं। जिसने हम जैसे छोटे किसानों की समस्या का समाधान हो रहा है।