हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे युवाओं के हाथों में अब वॉलीबॉल
सुकमा, 03 मई 2026/sns/-नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब बदलाव की एक नई और बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवाओं (42 महिलाएं और 71 पुरुष) के जीवन में “नया सवेरा“ आ चुका है। कभी जंगलों में भटकने और हाथों में घातक हथियार थामने वाले ये युवा अब न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, बल्कि पुनर्वास केंद्र के परिसर में पहली बार इन युवाओं द्वारा लगाए गए श्भारत माता की जयश् के नारे सुकमा के बदलते और सुरक्षित होते भविष्य की गवाही दे रहे हैं।
पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या पूरी तरह अनुशासित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर गार्डनिंग और साफ-सफाई करने के बाद सभी युवा मिल-जुलकर नाश्ता और खाना तैयार करते हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी जैसी आवश्यक चीजें सिखाते हैं। इसके साथ ही, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) भी दी जा रही है। समाज का वैध हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो रूम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज भी प्राथमिकता से बनवा रहा है।
प्रशासन की इस पहल का सबसे खूबसूरत रंग खेल और मनोरंजन के मैदान में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा के अनुरूप, जब इन पूर्व नक्सलियों से उनकी पसंद पूछी गई, तो सबसे ज्यादा रुझान वॉलीबॉल के प्रति दिखा। इसके बाद प्रशासन ने खेल प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कभी अत्याधुनिक हथियार संभालने वाले इन हाथों में जब वॉलीबॉल आई, तो मैदान पर उनकी श्किकश् और खेल की प्रतिभा देखकर हर कोई हैरान रह गया। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाकर बेहद खुश और उत्साहित हैं।
दिनभर की रचनात्मक गतिविधियों और खेल के बाद शाम को युवा संगीत कक्ष में सुर-ताल मिलाते हैं, जिससे उनका भरपूर मनोरंजन होता है। वर्तमान डिजिटल युग कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए जिला प्रशासन ने इन युवाओं को 5जी स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए हैं। इस आधुनिक तकनीक के जरिए देश-दुनिया की खबरों से कटे रहने वाले ये युवा अब समकालीन समाज से सीधे जुड़ पा रहे हैं। पुनर्वास केंद्र का यह मानवीय और विकासात्मक मॉडल साबित करता है कि सही दिशा और संवेदनशीलता मिले, तो भटके हुए युवाओं को भी देश की प्रगति का मजबूत स्तंभ बनाया जा सकता है।