जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रभावी संचालन
दुर्ग, 12 जून 2026/sns/- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। जिले में निर्मित 05 फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के माध्यम से अब ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से सेप्टिक टैंक की सफाई की सुविधा मिल रही है।
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा “ग्रामीणों का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है। सेप्टिक टैंकों का असुरक्षित निष्पादन न केवल गंदगी फैलाता है, बल्कि बीमारियों का भी कारण बनता है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक संयंत्र के माध्यम से प्रतिदिन न्यूनतम 02 ट्रिप डी-स्लजिंग (सफाई) का कार्य सुनिश्चित किया जाए। ग्रामवासियों से मेरी अपील है कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने घर के सेप्टिक टैंक प्रति 03 से 04 वर्षों में अनिवार्यतः खाली करवाएं। निजी वाहनों की मनमानी और अवैध डंपिंग को रोकने हेतु प्रशासन कठोर कार्रवाई कर रहा है, आप केवल अधिकृत शासकीय सेवाओं का ही लाभ लें।”
जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग दुबे ने जानकारी देते हुए कहा “जिले के सभी 381 ग्रामों को इन संयंत्रों से जोड़कर एक व्यवस्थित तंत्र विकसित किया गया है। पंचायत स्तर पर नाममात्र के यूजर चार्ज पर यह सुविधा उपलब्ध है। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी गांव गंदगी मुक्त न रहे। हमने प्रत्येक विकासखंड में नोडल अधिकारी और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि ग्रामीणों को तत्काल सेवा मिल सके।”
जन-सुविधा और शुल्क विवरण
जिले में ग्रामीण स्वच्छता के प्रति जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए, ग्रामीणों को सहायता हेतु सुगम संपर्क व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। जिला स्तर पर किसी भी प्रकार की जानकारी या शिकायत हेतु 2214040 पर संपर्क किया जा सकता है। विकासखंड स्तर पर सेवाओं के सुचारू संचालन हेतु ग्राम पंचायतवार उत्तरदायी अधिकारियों के नाम और संपर्क नंबर जारी किए गए हैं। जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत कोलिहापुरी ग्राम पंचायत के लिए श्री भूपेंद्र कुमार (9770547944) और सचिव श्री निमेश भोईर (9977030456) से संपर्क किया जा सकता है। इसी प्रकार, जनपद पंचायत धमधा के अंतर्गत पथरिया और लिटिया ग्राम पंचायतों के लिए श्री नीरज/सूरज (7869847187) और सचिव श्री मिथलेश यदु (9098878427) अधिकृत किए गए हैं। जनपद पंचायत पाटन के अंतर्गत पतोरा और रानीतराई ग्राम पंचायतों के लिए श्री भुनेश्वर साहू (9691398116), श्री नरेश महतो (8085520725) और सचिव श्री कन्हैया पांडे (9981368908) का संपर्क सूत्र बनाया गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि वे इन अधिकृत नंबरों पर संपर्क कर न्यूनतम निर्धारित शुल्क पर सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से अपने सेप्टिक टैंक खाली करवाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता बनी रहे और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ग्राम पंचायत से 5 किलोमीटर की परिधि में 1500/- रुपये का निर्धारित शुल्क लिया जाता है।
अवैध गतिविधियों पर कड़ा रुख
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निजी वाहनों द्वारा अपशिष्ट को खुले में फेंकना एक दंडनीय अपराध है। धौराभाठा और मुरमुंदा में हुई शिकायतों के बाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है। कलेक्टर दुर्ग ने समस्त सरपंचों और सचिवों को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र में अवैध वाहनों की निगरानी करें और किसी भी उल्लंघन की सूचना तत्काल जनपद कार्यालय को दें।
डी-स्लज वाहन की क्रियाशीलता का विवरण
दुर्ग जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत फिकल स्लज मैनेजमेंट और डी-स्लज वाहनों के संचालन का प्रदर्शन अत्यंत उत्साहजनक रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिले की पांच प्रमुख ग्राम पंचायतों—कोलिहापुरी (दुर्ग), पथरिया एवं लिटिया (धमधा), तथा पतोरा एवं रानीतराई (पाटन)—में 381 गांवों को कवर करते हुए कुल 254 डी-स्लज ट्रिप सफलतापूर्वक संचालित किए गए। इस दौरान प्राप्त कुल यूजर चार्ज 5,89,300 रुपये रहा, जिसके सापेक्ष ड्राइवर/सैलरी, डीजल और अन्य मदों में कुल 3,73,237 रुपये का व्यय हुआ, जिससे इस प्रबंधन से कुल 2,16,063 रुपये की शुद्ध बचत प्राप्त हुई। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान भी यह अभियान निरंतर सक्रिय है। वर्ष 2026 के अप्रैल माह में 50 और मई माह में 44 ट्रिप पूरे किए गए हैं, जिनसे अब तक 2,11,000 रुपये का यूजर चार्ज अर्जित किया गया है। विशेष रूप से पथरिया (धमधा) और पतोरा (पाटन) की इकाइयां इस पूरे अभियान में सर्वाधिक सक्रिय रही हैं, जहाँ बड़ी संख्या में डी-स्लजिंग कार्य किया गया है। जिला प्रशासन अब इस अभियान को और अधिक गति देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि ग्रामीण अंचल को पूरी तरह से स्वच्छ और संक्रमण मुक्त बनाया जा सके।