आत्मसमर्पण के बाद बदली तकदीर, पीएम आवास ने सुभाष को दिया सुरक्षित आशियाना

सुकमा, 27 जूलाई 2026/sns/- छिंदगढ़ विकासखंड में स्थित ग्राम पंचायत किकिरपाल निवासी सुभाष पिता गंगाराम की जिंदगी कभी हिंसा और नक्सल गतिविधियों के साये में थी। लेकिन आत्मसमर्पण कर उन्होंने बंदूक का रास्ता छोड़कर शांति, विकास और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया। शासन की पुनर्वास नीति ने उनके इस फैसले को नई दिशा दी और आज सुभाष अपने परिवार के साथ सम्मान एवं सुरक्षा का जीवन जी रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि संवेदनशील प्रशासनिक पहल किस तरह किसी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए संचालित विशेष परियोजना के तहत सुभाष को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ मिला। योजना से प्राप्त सहायता का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने परिवार के लिए पक्का मकान तैयार किया। कभी मौसम की मार और असुरक्षा के बीच जीवन गुजारने वाले परिवार को अब मजबूत छत और सुरक्षित आशियाना मिला है। सुभाष के लिए यह घर महज ईंट-पत्थरों से बना मकान नहीं, बल्कि बदली हुई जिंदगी और सुरक्षित भविष्य की नींव है।

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि आत्मसमर्पित व्यक्तियों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर विकास की मुख्यधारा में लाना प्रशासन की प्राथमिकता है। वहीं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने बताया कि विशेष परियोजना के पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग लगातार प्रयासरत है। सुभाष को मिला आवास इसी पहल का एक सकारात्मक उदाहरण है, जहां पुनर्वास के साथ-साथ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर आत्मसमर्पित व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है।

अपने नए घर की चौखट पर खड़े सुभाष के लिए यह बदलाव भावुक कर देने वाला है। उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आत्मसमर्पण के बाद शासन ने उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ लौटने का अवसर दिया। उनके शब्दों में, “यह पक्का घर मेरे परिवार के लिए केवल मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और नई जिंदगी की शुरुआत है।” सुभाष की कहानी हिंसा से शांति, संघर्ष से विकास और असुरक्षा से सुरक्षित आशियाने तक के उस बदलाव की मिसाल बन गई है, जिसमें शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं ने नई उम्मीद को मजबूत आधार दिया है।

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