सरस्वती शिशु मंदिर प्रगति नगर में भव्य आचार्य अभिनंदन समारोह
कोरब, 07 सितंबर 2026/sns/-भारतीय ज्ञान-परंपरा के संवाहक, मनीषी एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पावन जयंती (शिक्षक दिवस) के पुण्य अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, प्रगति नगर (एनटीपीसी कोरबा) के पावन प्रांगण में भव्य ‘आचार्य अभिनंदन समारोह’ का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में किया गया। सर्वेश्वर शिक्षण समिति, जमनीपाली द्वारा आयोजित इस समारोह में प्रगति नगर एवं जमनीपाली दोनों विद्या-मंदिरों के तपस्वी, निष्ठावान एवं कर्मठ आचार्यों का वंदन एवं अभिनंदन किया गया। समारोह में उपस्थित अतिथियों ने गुरु की भारतीय परंपरा में प्रतिष्ठा, शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण में आचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समारोह का विधिवत शुभारंभ वीणावादिनी मां सरस्वती, ॐ, भारत माता एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तैलचित्र के समक्ष दीप-प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन तथा वैदिक स्वस्तिवाचन के साथ हुआ। इसके पश्चात छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना एवं गुरु-वंदना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक दिव्यता से सराबोर कर दिया। श्रद्धा और सम्मान से ओत-प्रोत इस आयोजन में आचार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को नमन किया गया।
आचार्य सम्मान और विद्यालय विकास पर अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार राठौर ने रखे विचार
प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुमार राठौर ने मंचासीन अतिथियों का भावभीना परिचय एवं औपचारिक स्वागत प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यालय के आधारभूत विकास में एनटीपीसी कोरबा के सतत योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि एनटीपीसी प्रबंधन ने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए विद्यालय में जिस सुसज्जित एवं नवीकृत सभा-भवन का निर्माण व लोकार्पण कराया है, वह विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
उन्होंने इसके लिए मुख्य अतिथि श्री शत्रुघ्न बेहरा (महाप्रबंधक) एवं विशिष्ट अतिथि श्री विजय कुमार गर्ग (महाप्रबंधक) का संपूर्ण विद्यालय परिवार एवं प्रबंध समिति की ओर से हृदयतल से आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने आशा एवं विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्र-निर्माण के इस पावन शैक्षणिक प्रकल्प को भविष्य में भी एनटीपीसी का ऐसा ही स्नेहपूर्ण एवं संबलकारी सहयोग निरंतर प्राप्त होता रहेगा।
गुरु को जीवन-शिल्पी बताते हुए श्री अमरदीपक देवांगन ने किया आचार्यों के योगदान का बखान
प्रबंधकारिणी समिति के सचिव श्री अमरदीपक देवांगन ने सनातन जीवन-मूल्यों के आलोक में गुरु-शिष्य परंपरा एवं गुरु की अलौकिक महिमा का भावपूर्ण बखान किया। उन्होंने कहा, “गुरु केवल साक्षर बनाने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि अंतर्मन के तिमिर को हरकर प्रज्ञा का दीप प्रज्वलित करने वाले जीवन-शिल्पी हैं। कुम्हार जिस प्रकार माटी को गढ़कर सुंदर घट का रूप देता है, ठीक उसी प्रकार हमारे आचार्य बालकों की दुर्बलताओं को दूर कर उनमें राष्ट्रप्रेम, शुचिता और उच्च नैतिक संस्कारों की प्राण-प्रतिष्ठा करते हैं।”
उन्होंने कहा कि आज समाज भौतिकता की अंधी दौड़ में भटक रहा है और ऐसे संक्रमण काल में विद्या भारती के आचार्यों का त्याग एवं निष्ठा पूरे समाज के लिए प्रकाशस्तंभ है। उन्होंने कहा कि आचार्यों का सम्मान करना वास्तव में समाज का स्वयं को गौरवान्वित करना है।
मुख्य अतिथि श्री शत्रुघ्न बेहरा ने चरित्र निर्माण को बताया शिक्षा का मूल उद्देश्य
मुख्य अतिथि माननीय श्री शत्रुघ्न बेहरा, महाप्रबंधक, प्रचालन एवं अनुरक्षण, एनटीपीसी लिमिटेड, कोरबा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा, “सच्चा शिक्षक वह नहीं जो केवल पाठ्य-पुस्तकों का अक्षर-ज्ञान कराए, अपितु वह है जो अंतश्चेतना को झकझोर कर जीवन-मूल्यों की नींव सुदृढ़ करे। औद्योगिक एवं तकनीकी विकास तभी सार्थक है, जब समाज की धुरी चरित्रवान नागरिकों के हाथ में हो; और इस चरित्र-निर्माण की पावन भट्ठी में तपने वाले शिल्पकार केवल हमारे आचार्य हैं। आचार्यों का यह मौन तप राष्ट्र को अविचल सम्बल प्रदान करता है।”
उन्होंने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम और अक्षर-ज्ञान तक सीमित न मानते हुए जीवन-मूल्यों एवं चरित्र निर्माण से जोड़ा। उनके वक्तव्य में आचार्यों के मौन तप, समर्पण और राष्ट्र के लिए उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
विशिष्ट अतिथि श्री विजय कुमार गर्ग ने गुरु को बताया संस्कार और ज्ञान के संतुलन का आधार
विशिष्ट अतिथि माननीय श्री विजय कुमार गर्ग, महाप्रबंधक, रसायन, एनटीपीसी लिमिटेड, कोरबा ने कहा, “रसायन शास्त्र जिस प्रकार विभिन्न तत्त्वों के संतुलन से नवीन ऊर्जा का सृजन करता है, ठीक उसी प्रकार एक गुरु विद्यार्थी के अंतर्मन में संस्कार, विचार एवं ज्ञान का संतुलन स्थापित कर उसे समाजोपयोगी व्यक्तित्व बनाता है। आधुनिक युग की चकाचौंध में भी विद्या भारती के आचार्य जिस प्रकार विद्यार्थियों में राष्ट्रनिष्ठा, विनम्रता और आत्मसंयम का बीजारोपण कर रहे हैं, वह समस्त मानवता के लिए अनुकरणीय एवं वन्दनीय है।” उन्होंने विद्या भारती के आचार्यों द्वारा विद्यार्थियों में राष्ट्रनिष्ठा, विनम्रता एवं आत्मसंयम जैसे मूल्यों के विकास के प्रयासों को अनुकरणीय बताया।
मुख्य वक्ता श्री जुड़ावन सिंह ठाकुर ने आचार्य को बताया राष्ट्र निर्माण का शिल्पकार
मुख्य वक्ता आदरणीय श्री जुड़ावन सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष, विद्या भारती, मध्य क्षेत्र ने सनातन ऋषि-परंपरा में आचार्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “हमारी सनातन ऋषि-परम्परा में आचार्य का पद देवतुल्य माना गया है—‘गुकारस्त्वन्धकारस्तु रुकारस्तन्निरोधकः’। आचार्य वह सूर्य हैं जो अज्ञान के सघन अंधकार को भेदकर ज्ञान के शाश्वत आलोक का संचरण करते हैं।”
उन्होंने कहा कि विद्या भारती केवल प्रमाणपत्र बांटने वाला संस्थान नहीं, अपितु व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की अविरल साधना है। आचार्यों का अभिनंदन समाज द्वारा उनके अप्रतिम त्याग, निःस्वार्थ साधना एवं राष्ट्र-सेवा के प्रति व्यक्त की गई विनम्र कृतज्ञता है।
रोली-तिलक, श्रीफल और उपहार देकर हुआ आचार्यों एवं दीदियों का अभिनंदन
कार्यक्रम के मुख्य चरण में मंचासीन अतिथियों एवं समिति के पदाधिकारियों द्वारा दोनों विद्यालयों के समस्त आचार्यों एवं दीदियों का रोली-तिलक लगाकर, श्रीफल एवं उपहार सादर समर्पित कर अभिनंदन किया गया। अपने आचार्यों का ऐसा दिव्य सम्मान देखकर उपस्थित जनसमुदाय भाव-विभोर हो उठा। सम्मान के इस अवसर पर करतल ध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठा और वातावरण गुरुजनों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता की भावना से भर गया।
समारोह में सर्वेश्वर शिक्षण समिति के पदाधिकारीगण, स्थानीय प्रबंध समिति के सदस्य तथा प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय जीवन-मूल्यों, संस्कार आधारित शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में आचार्यों की भूमिका को केंद्र में रखते हुए वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।