ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य फसलों की खेती हेतु कार्यशाला आयोजन
बलौदाबाजार, 12 अक्टूबर 2026/sns/- कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा जिला पंचायत सभागार में ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य फसलों की खेती विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला मे जिले के कृषक उत्पादक संगठन के प्रगतिशील कृषक एवं ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने वाले 200 से अधिक कृषक एवं किसान के उपज को क्रय करने वाले विभिन्न निजी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
उप संचालक कृषि दीपक कुमार नायक ने बताया कि जिले में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है और ग्रीष्मकालीन धान में पानी की खपत बहुत अधिक होती है, इसलिए शासन द्वारा किसानों को धान के बदले अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कार्यशाला में किसानों को फसल विविधीकरण, ग्रीष्मकालीन धान के बदले अनाज- गेहूं, मक्का, दलहनी फसलें – चना, मसूर, मूंग, उड़द, तिवड़ा, तिलहनी फसलें सरसों, मूंगफली, तिल, कुसुम, सूरजमुखी, अलसी आदि की खेती को बढ़ावा देने
उन्नत किस्मों और तकनीक के बारे में जानकारी दी गई।
ई-टोकन से खाद वितरणरबी वर्ष 2026-27 में रासायनिक उर्वरकों का वितरण समितियों एवं निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों से ई-टोकन के माध्यम से किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा तैयार किया गया मोबाइल एप फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल एफएफएस के माध्यम से किसान अपना किसान आईडी या आधार नम्बर को सत्यापित कराकर पंजीकृत रकबा/खसरा में फसल की जानकारी इंद्राज कर अनुशंसित उर्वरक का क्यूआर आधारित टोकन प्राप्त कर सकते है, जिसकी वैद्यता 2 दिवस रहेगी। संबंधित उर्वरक विक्रय केंद्रों या समिति में टोकन को स्कैन कराकर निर्धारित उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं, इससे उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक किसानों को समय पर खाद मिल सकेगा।
समर्थन मूल्य पर खरीदी पीएम आशा योजना अंतर्गत चयनित फसलों जैसे-अरहर, चना, मसूर, सरसों आदि की खरीदी समर्थन मूल्य पर सहकारी समितियों के माध्यम से किया जावेगा, जिससे किसानों को उनकी उपज का अधिकतम् मूल्य प्राप्त होगा।
एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन जिले के समस्त कृषकों को अपने सभी खसरों का एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य है। सभी कृषक सहकारी समिति अथवा च्वाईस सेन्टर के माध्यम से एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन सुनिश्चित करावें, ताकि आगामी माह में धान विक्रय में परेशानी न हो।
कृषक उन्नति योजना इस योजना के अंतर्गत कृषकों को धान के बदले अन्य फसलों की खेती पर प्रति एकड़ 15000 रूपये आदान सहायता राशि एवं खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास फसल लेने वाले कृषकों को 10000 रूपये प्रति एकड़ आदान सहायता राशि सीधे खाते में प्रदाय किया जाएगा। उपरोक्त योजना का लाभ लेने हेतु कृषकों को सहकारी समितियों के माध्यम से एकीकृत पोर्टल में फसल का विवरण इन्द्राज कराना होगा। साथ ही गिरदावरी में फसल का विवरण दर्ज होना अनिवार्य है।
प्राकृतिक खेती -केन्द्र शासन के द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने क उद्देश्य से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना संचालित की जा रही है, जिसमें किसानों को प्रशिक्षण के माध्यम से जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त, ब्र्रम्हास्त्र आदि का निर्माण एवं उपयोग संबंधी जानकारी दिया जा रहा है। जिले के कृषक कम लागत में रसायनमुक्त खेती की ओर अग्रसर है।
बीज उत्पादन कार्यक्रम- बीज में आत्मनिर्भर होने तथा अधिक आमदनी प्राप्त करने के उद्देश्य से कृषकों को बीज उत्पादन कार्यक्रम में सम्मिलित होने तथा पंजीयन प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
पराली (पैरा) जलाना प्रतिबंधित- किसानों को धान फसल काटने के पश्चात शेष पराली (पैरा) को न जलाकर उसका ऊँची प्रबंधन करने हेतु अपील किया गया। कृषक भाई धान कटाई के पश्चात् पराली (पैरा) को न जलाकर वेस्ट डिकम्पोजर के उपयोग से खाद बनाकर जैविक खेती कर सकते है।
जल संरक्षण– जिले में जल संरक्षण जागरूकता अंतर्गत मनरेगा के माध्यम से कृषक प्रक्षेत्रों में डबरी,कुआँ निर्माण आदि विषयों पर किसानों को जानकारी दी गई।
कार्यशाला में उप संचालक कृषि दीपक नायक, एसडीओ कृषि जयइन्द्र कंवर, सभी विकासखण्डों के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, एबीस फुड्स प्राईवेट लिमिटेड से शुभेन्द्र दुबे, यशस्वी एग्रोटेक प्राईवेट लिमिटेड एस.पी. चन्द्राकर एवं कूरो एग्रो ऑर्गेनिक फार्मिंग श्री जोशी, एफपीओ के कृृषक सदस्य एवं अन्य प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।