डिजिटल माध्यमों से छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को पहुंचाएं दुनिया तक- श्री डेका

रायपुर, 14 अक्टूबर 2026/sns/- राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की यात्रा विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और इससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के सामूहिक योगदान का परिणाम है। उन्होंने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए किए गए योगदान को ऐतिहासिक बताया। राज्यपाल ने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति देता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास एवं सांस्कृतिक जीवन को अभिव्यक्त करते हैं। छत्तीसगढ़ की पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध लोककलाओं को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कला के क्षेत्र में सफलता के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित सांसद संतोष पांडे ने कहा कि राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती ने अपनी पुत्री की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जो दान दिया, वह अद्वितीय और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जमीन दान करना भी कठिन हो गया है, लेकिन राजपरिवार ने दूरदर्शी सोच के साथ ऐसा संस्थान स्थापित किया, जिसने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉक्टर लवली शर्मा ने दिया। अंत में विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े ने आभार व्यक्त किया।

समारोह में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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