रायगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर होगी दलहन-तिलहन फसलों की खरीदी, 31 अक्टूबर तक कराएं पंजीयन
रायगढ़, 14 अक्टूबर 2026/sns/- किसानों की आय को सुरक्षित करने और दलहन-तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2026-27 में अधिसूचित दलहन एवं तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी की जाएगी। इसके लिए जिले में 17 सहकारी समितियों को अधिसूचित किया गया है। योजना के तहत अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन की खरीदी की जाएगी। किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य है।
उप संचालक कृषि रायगढ़ ने बताया कि पीएम-आशा योजना का उद्देश्य बाजार में कीमतों में गिरावट के कारण किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना तथा उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। कई बार दलहन-तिलहन फसलों के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में योजना के माध्यम से किसानों की आय को संरक्षण देने और उन्हें इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इन दरों पर होगी खरीदी
योजना के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अधिसूचित फसलों की खरीदी की जाएगी। फसलों के समर्थन मूल्य इस प्रकार हैं-अरहर 8,450 रुपये प्रति क्विंटल, उड़द-8,200 रुपये प्रति क्विंटल, मूंग-8,780 रुपये प्रति क्विंटल, मूंगफली-7,517 रुपये प्रति क्विंटल तथा सोयाबीन 5,708 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
जिले की 17 सहकारी समितियों में होगी खरीदी
विकासखंडवार अधिसूचित सहकारी समितियों में रायगढ़ विकासखंड के कोतरा, कछार और लोईंग, विकासखण्ड खरसिया के मुरा और बानीपाथर, विकासखण्ड तमनार के तमनार, पुसौर के कोंड़ातराई और नवापारा (मांड), विकासखण्ड धरमजयगढ़ के धरमजयगढ़ और छाल, घरघोड़ा के घरघोड़ा और कुडुमकेला तथा लैलूंगा विकासखंड के लैलूंगा, कोड़ासिया, लारीपानी, लिबरा और राजपुर सहकारी समिति शामिल हैं।
पंजीयन के लिए इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
योजना का लाभ लेने के लिए नए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। वहीं, पूर्व से पंजीकृत किसानों को आवश्यकतानुसार अपने पंजीयन में संशोधन कराना अनिवार्य है। संबंधित खेतों में बोई गई दलहन-तिलहन फसलों के रकबे का गिरदावरी में दर्ज होना भी आवश्यक है। पंजीयन के लिए किसान अपने नजदीकी अधिसूचित सहकारी समिति में संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए ऋण पुस्तिका, बी-1, पी-2, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति आवश्यक होगा। पंजीयन, संशोधन अथवा योजना से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
दलहन-तिलहन की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय
जिले में ऊंचे और कम अनुकूल खेतों में कई किसान जल्दी पकने वाली धान की किस्मों की खेती करते हैं, लेकिन ऐसे खेतों में धान का उत्पादन अपेक्षाकृत कम होने से उन्हें लागत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पाता। दलहन-तिलहन फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित होने से किसान इन खेतों में वैकल्पिक फसलों की खेती कर बेहतर आय प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इससे धान पर निर्भरता कम करने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
रबी फसलों की भी होगी समर्थन मूल्य पर खरीदी
खरीफ सीजन के बाद आगामी रबी सीजन में भी अधिसूचित सहकारी समितियों के माध्यम से सरसों, चना और मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। किसान खरीफ फसलों की कटाई के बाद रबी सीजन में इन फसलों की खेती के लिए अभी से योजना बना सकते हैं। इससे जिले में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को अपनी आय बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे।