खरीफ सीजन हेतु समितियों में 28899 मेट्रिक टन उर्वरक भण्डारित
बलौदाबाजार, 13 मई 2026/sns/-राज्य शासन के मंशा अनुरूप एवं कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिले में आगामी खरीफ सीजन के लिये समितियों में उर्वरक भण्डारण किया जा रहा है।जिले को यूरिया 42930, डीएपी 16500, पोटाश 3500,एसएसपी 8000 तथा एनपीके 14500 कुल 85430 मिट्रिक टन का उर्वरक लक्ष्य प्राप्त हुआ है जिसके विरुद्ध उर्वरक भण्डारण यूरिया 15390, डीएपी 3692, पोटाश 1859,एसएसपी 3994 तथा एनपीके 3964 कुल 28899 मिट्रिक टन हो चुका है।अब तक यूरिया 1660, डीएपी 392, पोटाश 1764, एसएसपी 233 तथा एनपीके 226 कुल 2553 मिट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। जिले में उर्वरक भण्डारण वितरण का कार्य निरंतर जारी है।
वैकल्पिक उर्वरकों पर जोर – कृषि विशेषज्ञों के अनुसार केवल डी.ए.पी. पर निर्भर रहना न केवल जोखिम भरा है, बल्कि इससे मिट्टी का संतुलन भी बिगड़ सकता है। बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है। धान जैसी प्रमुख खरीफ फसल के लिए यूरिया, सुपर फॉस्फेट, पोटाश और एन.पी. के. जैसे उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग करना लाभकारी साबित होता है तथा डीएपी पर निर्भरता कम कर इसे वैकल्पिक उर्वरक के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही कृषकों को नील हरित काई, हरी खाद तथा जैव उर्वरक (बायो-फर्टिलाइजर्स) का उपयोग करने हेतु भी सलाह दिया गया है, जो की रासायनिक उर्वरको के निर्भरता पर कमी लाएगी।किसान बोरियों वाली खाद के स्थान पर नैनों यूरिया एवं नैनो डीएपी (तरल) को प्राथमिकता दें। यह न केवल परिवहन में आसान है बल्कि इसकी उपयोग क्षमता 90 प्रतिशत तक है। इसके छिड़काव से फसल को सीधा पोषण मिलता है और जमीन भी खराब नहीं होती ।
उप संचालक कृषि दीपक कुमार नायक ने बताया कि डी.ए.पी. की एक बोरी के बराबर पोषक तत्व अन्य विकल्पों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि 1 बोरी डी.ए.पी. के स्थान पर 3 बोरी एस.एस.पी. के साथ 20-25 किलो यूरिया, या 1.5 बोरी एन.पी.के. या 2 बोरी अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा 1 बोरी टी.एस.पी. के साथ 2 बोतल नैनो यूरिया (500 मि.ली.) और 2 बोतल नैनो डी.ए.पी. (500 मि.ली.) भी प्रभावी विकल्प हैं।