मोर गांव मोर पानी महा अभियान से कबीरधाम में आई जल समृद्धि
कवर्धा, 27 अगस्त 2026/sns/- राष्ट्रीय पंचायत दिवस 24 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में संरक्षित करने के उद्देश्य से “मोर गांव मोर पानी” महा अभियान का शुभारंभ किया गया था। अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, जल समृद्धि तथा ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए साधनों का सृजन करना है। कबीरधाम जिले में अभियान के तहत निर्मित जल संरचनाओं का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है।
अभियान के अंतर्गत विकसित भारत जी राम जी योजना के माध्यम से अमृत सरोवर, आजीविका डबरी, नवा तरिया, घरों में सोख्ता गड्ढे तथा पहाड़ी क्षेत्रों में कंटूर ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कराया गया। इन कार्यों से ग्रामीणों को लाखों मानव दिवस का रोजगार मिला तथा करोड़ों रुपये का मजदूरी भुगतान किया गया। वहीं, इन कार्यों से गांवों में वर्षा जल को रोकने और संरक्षित करने के स्थायी स्रोत भी तैयार हुए हैं।
जिले में 280 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है। प्रत्येक डबरी का आकार लगभग 20×20 मीटर (400 वर्गमीटर) है। इन सभी डबरियों से लगभग 280 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा तथा भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ आसपास के हैंडपंपों को रिचार्ज करने में मदद मिलेगी। डबरियों में मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों की आजीविका के नए अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।
25 नवा तरिया से 125 एकड़ क्षेत्र को मिलेगा लाभ
जिले में 25 नवा तरिया का निर्माण किया गया है। प्रत्येक तरिया का आकार लगभग 80×80 मीटर (6,400 वर्गमीटर) है। इनसे अनुमानित 125 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही भू-जल संवर्धन, हैंडपंप रिचार्ज, मत्स्य पालन, उद्यानिकी फसलों तथा सामूहिक वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
2 लाख से अधिक सोख्ता गड्ढों से भू-जल संरक्षण
जल संचय जनभागीदारी के अंतर्गत ग्रामीणों, महिला समूहों सहित विभिन्न लोगों ने अपने घरों के आंगनों में स्वप्रेरणा से 2 लाख से अधिक सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया है। प्रत्येक गड्ढे का आकार लगभग 2×2×2 फीट है। इन गड्ढों के माध्यम से बारिश का पानी सीधे जमीन में समा रहा है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद मिल रही है। इनका निर्माण ग्रामीणों ने स्वयं प्रेरणा से किया है और इस पर किसी प्रकार की राशि व्यय नहीं की गई है।
छोटे स्टॉप डैम से रुका बरसाती पानी
गांवों के बरसाती नालों में छोटे स्टॉप डैम का निर्माण भी किया गया है। पहले जो पानी बहकर निकल जाता था, वह अब रुककर खेतों की सिंचाई में उपयोग हो रहा है। इससे भू-जल स्तर बेहतर होने के साथ आसपास के हैंडपंपों को भी रिचार्ज करने में मदद मिल रही है।
जल संरचनाओं से जुड़ रही आजीविका
निर्मित जल संरचनाओं में मत्स्य पालन विभाग द्वारा अभिसरण के माध्यम से आजीविका गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। निजी डबरी के हितग्राहियों को आवश्यकता के अनुसार 1 से 5 किलो तक मछली बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें रोहू और कतला जैसी स्थानीय स्तर पर पसंद की जाने वाली प्रजातियां शामिल हैं। लगभग 5 से 6 महीने में मछलियां तैयार होने के बाद हितग्राही स्थानीय बाजार में बिक्री कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। विभाग द्वारा हितग्राहियों को मत्स्य पालन के लिए तकनीकी सहायता भी दी जा रही है तथा उन्हें कुशल व्यावसायिक गतिविधि के रूप में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विकासखंड बोड़ला के ग्राम पंचायत राली, बाटीपथरा, अमेरा, तितरी, पिपरखुटा, साजाटोला, समनापुर एवं तरेगांव मैदान सहित अन्य 35 आजीविका डबरी के हितग्राहियों तथा सहसपुर लोहारा क्षेत्र के 2 हितग्राहियों को मत्स्य विभाग द्वारा मछली बीज उपलब्ध कराया जा चुका है।
जल संरक्षण से समृद्धि की ओर कबीरधाम
“मोर गांव मोर पानी” महा अभियान ने कबीरधाम में जल संरक्षण, रोजगार और आजीविका को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में प्रभावी परिणाम दिए हैं। वनांचल से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक आजीविका डबरी, निजी डबरी, नवा तरिया और छोटे स्टॉप डैम पानी से लबालब हैं। संग्रहित पानी खेतों की सिंचाई में उपयोग हो रहा है, भू-जल स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है तथा मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से ग्रामीणों की आय के नए रास्ते खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की मंशा के अनुरूप यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ रोजगार, आजीविका और आत्मनिर्भरता का आधार मजबूत कर रहा है।