सेवा संकल्प अभियान से सशक्त हुई नरायणी, आजीविका के नए अवसरों से बनीं लखपति दीदी
मोहला, 18 सितंबर 2026/sns/- नरायणी भुआर्य एक सामान्य कृषक परिवार में विवाह हुआ था। परिवार के भरण-पोषण के लिए रोजी-मजदूरी पर निर्भरता थी। कम पढ़ी-लिखी होने और आत्मविश्वास की कमी के कारण बाहर जाकर काम करना उनके लिए आसान नहीं था। स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता और शासन की योजनाओं की जानकारी का भी अभाव था। वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के सीआरपी के माध्यम से वे दिव्या स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों, वित्तीय सहायता और सामूहिक प्रयास की शक्ति के बारे में जानकारी मिली। यही जुड़ाव उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत बना।
– 10 बकरियों से शुरू हुआ सफर, अब 70-80 बकरियों का पालन
नरायणी ने एक ही गतिविधि तक सीमित न रहते हुए अपनी आजीविका को और मजबूत करने का प्रयास किया। उन्होंने पशुधन विकास विभाग से बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद 10 बकरियों से बकरी पालन की शुरुआत की। मेहनत, देखभाल और निरंतर प्रयास से आज उनके पास लगभग 70 से 80 बकरियां हैं। वे स्वयं बकरियों के टीकाकरण एवं देखभाल का कार्य करती हैं। बकरी पालन से उन्हें लगभग 65 हजार रुपये वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार हॉलर मिल, आटा चक्की एवं बकरी पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से नरायणी की कुल वार्षिक आय लगभग 1.25 लाख रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक रूप से सशक्त होकर वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे रही हैं और भविष्य के लिए भी बेहतर संभावनाएं तैयार कर रही हैं।