प्रमिला ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर खेती

अम्बिकापुर, 25 सितंबर 2026/sns/- ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आज स्वरोजगार के विभिन्न माध्यमों को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। जिले के बतौली विकासखंड की ग्राम पंचायत सिलमा की प्रमिला सिंह ने भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका को मजबूत किया और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया

स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया सफर-
प्रमिला वर्ष 2012 में फूल स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें समूह की अन्य सदस्यों के माध्यम से विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी तथा स्वरोजगार की प्रेरणा मिली। समूह के माध्यम से उन्होंने 50 हजार रुपए का ऋण लेकर खेती का कार्य शुरू किया

दो एकड़ भूमि में विविध फसलों से बढ़ी आमदनी, सिलाई एवं मुर्गी पालन से भी हुई अतिरिक्त आय-
प्रमिला बताती हैं कि उन्होंने एक एकड़ भूमि में गन्ने की खेती तथा एक एकड़ भूमि में सब्जी, मक्का एवं सूरजमुखी की खेती शुरू की। मेहनत और बेहतर कृषि प्रबंधन से खेती से अच्छी आमदनी होने लगी।उन्हें गन्ने के उत्पादन से लगभग एक लाख रुपए तथा मक्का एवं सब्जी उत्पादन से लगभग एक लाख रुपए की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है।
वहीं उन्होंने समूह के माध्यम से सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सिलाई कार्य शुरू किया। सिलाई के साथ उन्होंने मुर्गी पालन भी शुरू किया, इन कार्यों से उन्हें प्रतिवर्ष 50 हजार रुपए से अधिक का अतिरिक्त आय प्राप्त हो रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति को और मजबूती मिली।

मजबूत हुई आर्थिक स्थिति-
खेती, सिलाई और मुर्गी पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियों से प्रमिला को अच्छी आमदनी हो रही है, इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण, ऋण और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली, जिससे उन्हें अपनी आजीविका बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिली है।

गांव की अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा-
स्व-सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर रही हैं। प्रमिला की मेहनत और आत्मनिर्भर बनने का यह सफर गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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