चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से जिले में बारिश की संभावना

मुंगेली, 26 अक्टूबर 2026/sns/- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ की संभावना को देखते हुए छत्तीसगढ़ में मौसम प्रभावित होने की आशंका है। इसके प्रभाव से मुंगेली जिले में 29 अक्टूबर तक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने जिले के किसानों को फसलों, सब्जियों, फलदार पौधों एवं पशुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। तेज हवा और वर्षा की संभावना को देखते हुए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था, कटी फसलों का सुरक्षित भंडारण तथा पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
कृषि विभाग की उपसंचालक ने कहा है कि आगामी दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई अगले दो से चार दिनों तक टालने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को जल्द से जल्द सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर रखें। खेतों में अतिरिक्त पानी जमा होने से फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें। किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने तथा फसलों में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद आवश्यकतानुसार कीटनाशक एवं कवकनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। उतेरा फसल के रूप में तिवरा या अलसी की बुवाई करने वाले किसान फिलहाल कुछ दिनों तक बुवाई स्थगित रखें। वहीं, रबी फसलों की बुवाई नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करने की सलाह दी गई है।
वर्षा एवं तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों को भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, पछेती खीरा और पछेती करेला जैसी रबी सब्जियों की बुवाई नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से शुरू करने को कहा गया है। लौकी, करेला सहित अन्य सब्जियों को तेज हवाओं से बचाने के लिए उचित सहारा देने की व्यवस्था करें। जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस अथवा अन्य उपयुक्त साधनों से सहारा दें, ताकि तेज हवा से पौधों के गिरने या टूटने की आशंका कम हो सके। भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए सब्जियों एवं बागवानी फसलों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। जहां उपलब्ध हो, वहां ओलावृष्टि से बचाव के लिए उपयुक्त जाली का उपयोग भी किया जा सकता है। वर्षा की संभावना को देखते हुए पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें तथा उनके लिए पर्याप्त चारा और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करें। वज्रपात की आशंका के दौरान पशुओं को चराने से बचें और किसी भी स्थिति में पेड़ों के नीचे आश्रय न लें।

About The Author