बिहान दीदियों ने पेश की स्वावलंबन की नई मिसाल

सुकमा, 21 जूलाई 2026/sns/- सुकमा विकासखंड के एक सुदूर ग्रामीण वनांचल जीरमपाल से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद प्रेरक और बदलाव की बड़ी तस्वीर सामने आई है। यहाँ की ग्रामीण महिलाओं ने संगठित होकर ‘बम्लेश्वर स्व-सहायता समूह’ के माध्यम से ईंट निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) योजना से मिली समय पर वित्तीय और तकनीकी सहायता ने इन महिलाओं को आत्मनिर्भरता की एक नई राह दिखाई है। पिछले एक साल से जारी इस साझा प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही अवसर और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो ग्रामीण महिलाएं विकास की मुख्यधारा का नेतृत्व कर सकती हैं।
कभी सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली और आर्थिक तंगी से जूझने वाली इन 10 महिलाओं की जिंदगी आज पूरी तरह बदल चुकी है। समूह से जुड़कर ये महिलाएं अब प्रतिदिन सैकड़ों उच्च गुणवत्ता वाली ईंटों का निर्माण कर रही हैं। इनके कड़े परिश्रम और जिला प्रशासन के कुशल मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि समूह ने अब तक 5500 ईंटों का निर्माण व विक्रय कर 1 लाख 32 हजार रुपये की शानदार आय अर्जित की है। यह सिर्फ ईंटों की बिक्री नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की एक ठोस बुनियाद है।
इस आजीविका गतिविधि से होने वाली निरंतर आय ने न केवल इन परिवारों की माली हालत को सुधारा है, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी ऊपर उठाया है। समूह की सदस्य आसमती गर्व से बताती हैं कि पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों और पारिवारिक खर्चों के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था, लेकिन आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं। अब वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने, उनके लिए कपड़े खरीदने और घर के फैसलों में बराबरी की भूमिका निभाने में पूरी तरह सक्षम हो चुकी हैं। इन महिलाओं के चेहरों पर झलकता यह नया आत्मविश्वास प्रशासन के प्रयासों की सबसे बड़ी सफलता है।
जीरमपाल गांव की इस अनूठी और अनुकरणीय पहल ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की एक नई लहर पैदा कर दी है। जिला प्रशासन और ‘बिहान’ योजना के इस सफल समन्वय ने नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में विकास एवं स्वावलंबन का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया है। बम्लेश्वर समूह की इन कर्मठ महिलाओं की सफलता को देखकर अब गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं। वास्तव में, जीरमपाल की ये महिलाएं मिट्टी से सिर्फ ईंटें नहीं थाप रहीं, बल्कि सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ के सुनहरे सपने को हकीकत में बदल रही हैं।

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