सुकमा में “धरती आबा“ अभियान से बदलेगी वनांचल की तस्वीर

सुकमा, 08 अगस्त 2026/sns/- जनजातीय बाहुल्य जिला सुकमा में वनाधिकारों के सशक्तिकरण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू की गई है। “धरती आबा-जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान“ के तहत वन अधिकार अधिनियम, 2006 को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इस अभियान के माध्यम से सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और रणनीतिक प्रबंधन को नई गति दी जाएगी। इस महत्वपूर्ण कार्य में जिला प्रशासन का सहयोग करने हेतु तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, सिविल सोसायटी संगठनों (CSOs) और स्थानीय संस्थाओं से 10 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री हेमंत सिंहा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्ययोजना भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के दिशानिर्देशों के तहत संचालित की जा रही है। चयनित संस्थाएं सीधे ग्रामसभाओं के साथ मिलकर काम करेंगी और उन्हें सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण योजनाएं बनाने तथा उनके व्यवस्थित क्रियान्वयन में पूर्ण तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगी। इस योजना को सुचारू रूप से संचालित करने और जमीनी स्तर पर वनाश्रित समुदायों को मजबूत बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा आवश्यक वित्तीय सहायता का भी विशेष प्रावधान किया गया है।
इस साझेदारी के तहत संस्थाओं को वनांचल क्षेत्रों में क्षमता विकास और संसाधन प्रबंधन की बहुआयामी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। चयनित संगठन ग्रामसभाओं और सामुदायिक समितियों का क्षमता संवर्धन करेंगे, वन भूमि का सूक्ष्म सर्वेक्षण करेंगे तथा लघु वनोपज व प्राकृतिक संसाधनों की सटीक मैपिंग करेंगे। इसके अलावा, क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण करने के साथ-साथ सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों को सतत तकनीकी हैंडहोल्डिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और वनों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सके।

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