प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से मिला संबल
बीजापुर, 27 अगस्त 2026/sns/- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाने, हर खेत को पानी उपलब्ध कराने और ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के उद्देश्य पर काम करती है। जबकि एक महिला प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ लेकर खेती के साथ-साथ पशुपालन जैसी गतिविधियों को भी बेहतर तरीके से आगे बढ़ा रही है। बीजापुर जिले की सारूपा जागर की सफलता की कहानी खेती और पशुपालन के बेहतर तालमेल का प्रेरणादायक उदाहरण है।
सारूपा जागर ने कड़ी मेहनत, आधुनिक दृष्टिकोण और बेहतर प्रबंधन के जरिए पारंपरिक पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया। जब उन्होंने गाय पालन की शुरुआत की, तब उनके पास सीमित संसाधन थे। शुरुआती दौर में पशुओं की बीमारी, कम दूध उत्पादन और बाजार की सही जानकारी का अभाव उनके सामने बड़ी चुनौतियां थीं। उन्होंने समस्याओं से हार मानने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन को समझा और प्रबंधन में सुधार किया।
दूध के साथ डेयरी उत्पादों से बढ़ाई आमदनी
सारूपा ने केवल दूध बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मूल्य संवर्धन को अपनाते हुए दूध से शुद्ध घी, पनीर, खोया और छाछ जैसे डेयरी उत्पाद तैयार कर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू किया। इससे उन्हें अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने लगा और उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
मेहनत, धैर्य और वैज्ञानिक प्रबंधन बना सफलता का मंत्र
सारूपा का मानना है कि पशुपालन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि पशुओं के प्रति लगाव, धैर्य और वैज्ञानिक प्रबंधन का मेल है। डेयरी फार्मिंग में सफलता के लिए निरंतर मेहनत और धैर्य जरूरी है। उन्होंने इसी सोच के साथ अपने कार्य को आगे बढ़ाया और पशुपालन को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया। सारूपा जागर की यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ, आधुनिक तकनीक और निरंतर मेहनत को साथ लेकर खेती एवं पशुपालन को लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित किया जा सकता है।