सेवा की कहानी: स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं जल कुमारी

अम्बिकापुर, 15 अक्टूबर 2026/sns/-    स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। इसकी प्रेरक मिसाल हैं जल कुमारी, जिन्होंने महज 1500 रुपये से सूअर पालन शुरू कर आज अपनी सालाना आमदनी डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंचा दी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली जल कुमारी अब किराना दुकान, आटा-धान चक्की, सूअर एवं बकरी पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

’समूह से जुड़कर बचत की शुरुआत, स्वरोजगार को मिली नई दिशा’
जल कुमारी बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उन्हें बैंकिंग प्रक्रिया और बचत की जानकारी भी नहीं थी। 16 मार्च 2013 को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की। समूह से मिले 1500 रुपये से सूअर पालन का व्यवसाय प्रारंभ किया, जिससे वर्तमान में सालाना लगभग 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

इसके बाद उन्होंने समूह के माध्यम से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर किराना दुकान शुरू की तथा आटा चक्की और धान चक्की स्थापित की। अतिरिक्त आय के लिए दो बकरियों से बकरी पालन की शुरुआत की। आज उनके पास 17 से 18 बकरियां हैं, जिनसे सालाना लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

’आर्थिक आत्मनिर्भरता से परिवार के जीवन में आया बदलाव’
जल कुमारी के अनुसार विभिन्न आजीविका गतिविधियों से अब उनकी कुल वार्षिक आमदनी लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं। समूह से जुड़ने के बाद उनमें बचत, बैंकिंग और व्यवसाय संचालन के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

अपनी सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए जल कुमारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के साथ समाज में नई पहचान मिल रही है। उनकी सफलता छोटी बचत और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक उदाहरण है।

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