सुरक्षित बचपन अभियान: बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जिले में विशेष पहल
मुंगेली, 26 अक्टूबर 2026/sns/- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुंगेली के तत्वावधान में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। लायर्स हॉल, मुंगेली में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों को बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण एवं कानूनी अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य थीम “जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार” तथा संदेश “हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी” रखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम, बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संवेदनशील बनाना था, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गिरिजा देवी मरावी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं प्रभारी सचिव श्री सतीश कुमार खाखा, मुख्य विधिक सहायता बचाव अधिवक्ता श्री टीकम चंद्राकर तथा थाना प्रभारी पथरिया श्री कार्तिकेश्वर जांगड़े उपस्थित रहे। वक्ताओं ने प्रतिभागियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के प्रमुख कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा, ऑनलाइन सुरक्षा, बाल अधिकारों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा बाल संरक्षण के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला न्यायालय मुंगेली के समस्त न्यायाधीशगण, मुंगेली विकासखंड के शासकीय एवं निजी विद्यालयों के शिक्षकगण, जिला कलेक्टोरेट एवं पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के प्रतिनिधि, पैरा लीगल वालंटियर्स तथा बाल कल्याण समिति के अधिकारी-कर्मचारी प्रमुख रूप से शामिल हुए। जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि सुरक्षित बचपन अभियान का प्रथम चरण 31 अक्टूबर 2026 तक सघन जागरूकता अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। इसके बाद द्वितीय चरण 12 नवंबर 2026 से विद्यालय स्तर पर क्षमता निर्माण एवं निरंतर जागरूकता गतिविधियों के रूप में चलेगा। अभियान के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और संरक्षण से संबंधित जानकारी को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही शिक्षकों, पुलिस, विधिक सेवा संस्थाओं और बाल संरक्षण से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि बच्चों के हितों की रक्षा के लिए समय पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।