बलौदाबाजार वनमण्डल अंतर्गत व्यापक स्तर पर सीड बॉल रोपण अभियान प्रारम्भ
बलौदाबाजार, 24 जून 2026/sns/- वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देशानुसार वर्षा ऋतु के आगमन के साथ व्यापक स्तर पर सीड बॉल रोपण अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत वन मण्डल बलौदाबाजार अंतर्गत रिक्त वन क्षेत्रों, एएनआर क्षेत्रों, चारागाह विकास स्थलों, नदी-नालों के किनारों तथा विरल वन क्षेत्रों में प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी प्रजातियों का विस्तार पर बल दिया जाएगा।
अभियान के तहत वनमण्डल स्तर पर पूर्व से ही प्रत्येक वन परिक्षेत्र को लक्ष्य निर्धारित कर सीड बॉल निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत पूरे वनमण्डल में लगभग दो लाख से अधिक सीड बॉल तैयार करने एवं उनका चरणबद्ध रोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न वन परिक्षेत्रों द्वारा बड़ी मात्रा में सीड बॉल निर्माण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों में उनका रोपण भी किया जा रहा है।
वन परिक्षेत्र देवपुर अंतर्गत कसौदी परिसर के कक्ष क्रमांक 243 एवं 244, एएनआर क्षेत्र कक्ष क्रमांक 248 तथा जोंक नदी के किनारे सीड बॉल रोपण का कार्य किया गया,वहीं बारनवापारा परिक्षेत्र के विभिन्न परिसरों में इमली, चार, बेल, बेर, आम, बहेड़ा एवं अन्य स्थानीय प्रजातियों के सीड बॉल का रोपण किया गया।इसी प्रकार अल्दा, मुढ़ीपार, सुरबाय, डूमरपाली, बल्दाकछार, डाढ़ाखार, पैरागुड़ा सहित वनमण्डल के विभिन्न परिसरों में सीड बॉल रोपण की गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।
वनमण्डल द्वारा आगामी “युवान” कार्यक्रम के माध्यम से भी जल स्रोतों, छोटे नालों एवं नदी किनारे के क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फलदार एवं बहुउपयोगी वृक्ष प्रजातियों के रोपण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है बल्कि जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, वन्यजीवों के लिए खाद्य उपलब्धता तथा स्थानीय जैव विविधता को सुदृढ़ करना भी है।
वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने के लिए सीड बॉल रोपण एक प्रभावी एवं कम लागत वाली तकनीक है। जनसहभागिता, स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से वन क्षेत्रों की हरित आच्छादन में वृद्धि करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान यह अभियान और अधिक गति से संचालित किया जाएगा जिससे वन क्षेत्रों के पुनर्जीवन एवं जैव विविधता संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हो सके।